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वर्कलोड और आपका दिल: जानिए लंबे समय तक काम करना कैसे बढ़ाता है हार्ट अटैक का खतरा

लंबे समय तक बिना ब्रेक के काम करना केवल मानसिक थकान या तनाव तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह आपके दिल की सेहत पर भी सीधा असर डालता है। खराब लाइफस्टाइल और लगातार बढ़ते वर्कलोड के कारण वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ रहा है, जिससे दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

वर्कलोड और आपका दिल: जानिए लंबे समय तक काम करना कैसे बढ़ाता है हार्ट अटैक का खतरा- India TV Hindi
Image Source : MAGNIFIC वर्कलोड और आपका दिल: जानिए लंबे समय तक काम करना कैसे बढ़ाता है हार्ट अटैक का खतरा

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक काम करना, लगातार डेस्क पर बैठे रहना, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार बना रहने वाला स्ट्रेस हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। शुरुआती दौर में ये आदतें केवल शारीरिक थकान या सिरदर्द का कारण महसूस होती हैं, लेकिन लंबे समय तक यह लाइफस्टाइल हमारे दिल की सेहत पर गहरा और जानलेवा असर डालती है। जब व्यक्ति दिन में 9 से 10 घंटे लगातार एक ही जगह बैठकर काम करता है, तो शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है। फिजिकल एक्टिविटी न होने के कारण धमनियों में फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है। इससे ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है, जिससे आगे चलकर कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

लगातार तनाव और कम नींद इस स्थिति को और खतरनाक बना देते हैं। जब हम तनाव में होते हैं या रात में 7-8 घंटे की पूरी नींद नहीं लेते, तो हमारा शरीर कॉर्पोरेट स्ट्रेस हार्मोन 'कोर्टिसोल' और 'एड्रेनालाईन' का स्राव बढ़ाने लगता है। यह हार्मोन दिल की धड़कन और ब्लड वेसल्स पर दबाव डालते हैं, जिससे लगातार हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा होती है। हाई ब्लड प्रेशर को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि बिना किसी बड़े लक्षण के यह धमनियों को अंदर से कमजोर कर देता है। ऐसे में डॉ. संजय कुमार, सीनियर डायरेक्टर कार्डियोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हॉस्पिटल फरीदाबाद बता रहे हैं कि क्यों लंबे वर्किंग आवर्स की वजह से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता जा रहा है। 

1. लंबे वर्किंग आवर्स और हृदय रोग का कनेक्शन
सप्ताह में बहुत अधिक घंटे काम करने वाले लोगों में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ता देखा गया है। WHO और ILO के एक रिसर्च के मुताबिक 55 घंटे या उससे अधिक प्रति सप्ताह काम करने को, 35–40 घंटे की तुलना में, स्ट्रोक और इस्कीमिक हृदय रोग से मृत्यु के अधिक जोखिम से जोड़ा गया। इसका मतलब यह नहीं कि 55 घंटे पार करते ही बीमारी होगी, बल्कि लगातार वर्षों तक ऐसा रूटीन जोखिम को बढ़ा सकता है।

2. लगातार स्ट्रेस
काम का दबाव, डेडलाइन और पर्याप्त रिकवरी न मिलने से कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स लंबे समय तक बढ़े रह सकते हैं। इससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर बढ़ना, ब्लड वेसल्स की कार्यक्षमता प्रभावित होना और सूजन बढ़ना संभव है। पहले से हाइपरटेंशन, डायबिटीज या दिल की धमनी का रोग वाले लोगों में यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

3. लंबे समय तक बैठना भी एक अलग खतरा है
ऑफिस में 9–10 घंटे काम करने का मतलब अक्सर घंटों लगातार कुर्सी पर बैठे रहना है। इससे कैलोरी बर्न कम होता है और वजन बढ़ने, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और असामान्य लिपिड प्रोफ़ाइल की संभावना बढ़ सकती है। रोज़ एक्सरसाइज करना फायदेमंद है, लेकिन पूरे दिन लगातार बैठे रहना हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकता है। 

4. पर्याप्त नींद न लेना
देर रात तक काम और सुबह जल्दी उठने से यदि नींद नियमित रूप से 7 घंटे से कम हो रही है, तो हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। नींद शरीर और हार्ट हेल्थ के लिए बेहद जरूरी है। 

हार्ट को हेल्दी रखने के लिए क्या करें?
हर 30–60 मिनट में कुछ मिनट उठकर चलें। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट एरोबिक एक्सरसाइज करें और नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी करें। इसके अलावा 7–9 घंटे की नींद, संतुलित भोजन और स्मोकिंग से दूरी रखें। ब्लड प्रेशर, शुगर, कोलेस्ट्रॉल चेक करते रहें। 

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