ग्रामीण भारत के गरीब और उनकी आय के स्रोत :-
ग्रामीण भारत के आधे से अधिक परिवार जीविकोपार्जन के लिए दिहाड़ी पर आश्रित हैं और ग्रामीण आबादी की 75 प्रतिशत यानी 13.35 लाख परिवारों की मासिक आय 5,000 रुपये से भी कम है।
दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कृषि अर्थशास्त्री हिमांशु ने अर्जुन सेनगुप्ता समिति (2007) के निष्कर्षो का हवाला देते हुए समाचार पत्र 'मिंट' में लिखा है, "एक प्राथमिक विश्लेषण से ग्रामीण भारत की दयनीय स्थिति का पता चलता है, जहां चार में से तीन ग्रामीण परिवार प्रतिमाह 5,000 से भी कम कमाते हैं और लगभग 90 प्रतिशत परिवारों की आय प्रतिमाह 10,000 से भी कम है।" इस समिति ने अपनी रिर्पोट में भारत की 77 प्रतिशत आबादी को गरीब बताया है।
हिमांशु ने 'मिंट' में लिखा है, "ये आंकड़े राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के खपत सर्वेक्षण पर आधारित गरीबों और वंचितों के अन्य अनुमानों के लगभग समान ही हैं, जिसकी मीडिया ने अनदेखी की है।"
हालांकि, गरीबी के अनुमानों से इसकी तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि NICC के आंकड़ों से पता चला है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 67 करोड़ लोग प्रतिदिन 33 रुपये की आजीविका पर निर्भर हैं।
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