नई दिल्ली: वसुधैव कुटुंबकम...कुछ ऐसा ही नजारा विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में हर तरफ नजर आया। आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग के 35 साल पूरे होने पर इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। योग, कला और कलाकारों के अद्भुत रंगों से सराबोर इस उत्सव का आज बेहद ही शानदार समापन हुआ। अलग-अलग बोली, अलग-अलग रंग, अगल-अलग मजहबऔर अलग-अलग मुल्कों के लोगों ने इस 3 दिवसीय महोत्सव में अपनी सांस्कृतिक विरासत की झांकी दिखाई।
यहां पंजाब का भागड़ा था तो अमेरिका का हिप-हॉप भी। यहां भरतनाट्यम की झलक थी तो ब्राजील का सांबा डांस भी था। आस्था के मंत्र थे तो सूफी संगीत की रूहानी महफिल भी। मानो दिल्ली में यमुना किनारे तीन दिनों के लिए पूरी दुनिया बस गई हो।
फेस्टिवल के आखिरी दिन भी शानदार परफॉर्मेंस
वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल में भारत के अलग-अलग प्रांतों से आए कलाकारों ने अपने पारंपरिक नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया। सभी परफॉर्मेंस एकता, मानवता और वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश दे रही थी। वर्ल्ड कल्चर फेस्टिवल में अलग-अलग जगहों से आए आर्टिस्ट्स ने अपनी कला की ऐसी चमक बिखेरी कि कोई भी ताली बजाए बिना नहीं रह सका। 452 डांसर्स ने असम का बिहू डांस पेश किया। बिहू के बाद कुचिपुड़ी ने सबका दिल मोह लिया। 1050 कलाकारों ने एक साथ बेहद शानदार परफॉर्मेंस दी।
पाक कलाकारों पर टिकी थी सबकी नजरें
कुचिपुड़ी के बाद 8500 म्यूजिशियंस के ग्रैंड ऑर्केस्ट्रा ने परफॉर्म किया और ऐसी पेशकश दी कि हर कोई झूम उठा। रंग और रौशनी के बीच इस उत्सव में सबकी नजरें पाकिस्तान से आए कलाकरों पर टिकी थी। सरहद पार से आए कलाकारों ने आओ मिलकर बात करें की थीम पर अपनी परफॉमेंस पेश की। कलाकारों ने डांस ड्रामा पेश किया। देश और दुनिया के 30 से ज्यादा डांस फॉर्म्स का शानदार मंचन किया गया। मंगोलिया के 125 कलाकारों ने जिंदगी की थीम पर एक खूबसूरत डांस पेश किया। पारंपरिक पोशाक और रौशनी के बीच हुए नृत्य का संगम देखते ही बनता था।
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