पिथौरागढ़: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की मुनस्यारी के रहने वाले पदमश्री लवराज सिंह धर्मशत्तू ने 'माउंट एवरेस्ट' पर सातवी बार फतह हासिल कर भारतीय 'तिरंगा' लहरा कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वो पहले ऐसे भारतीय पर्वतरोही है जिनको यह खिताब हासिल हुआ है। उत्तराखण्ड के सीमान्त जिले पिथौरागढ़ की मुनस्यारी तहसील के बौना गॉव के रहने वाले 46 वर्षीय लवराज धर्मशत्तू बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेट है। उन्हें सातवी बार वहा जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। वो सातवीं बार दुनिया की सबसे ऊँची 29035 फीट'माउंट ऐवरेस्ट' चोटी पर बीएसएफ की 25 सदस्यीय टीम को लेकर निकले थे। उन्होंने वहा फतह हासिल कर सबसे ऊँची चोटी पर एक बार फिर तिरंगा फहरा दिया।
बीएसएफ के 'एवरेस्ट विजय' के लिये दो दल बनाये गये थे। पहली टीम के लीडर लवराज धर्मशक्तू थे। अपनी टीम में वो अकेले ऐसे थे, जिन्होंने पहले भी खतरनाक एवरेस्ट पर छठी बार तमाम अवरोधों के बाद भी विजय हासिल की थी। इस बार फिर उनका सामना बर्फीली हवाओ के साथ साथ बहुत ही खतरनाक बर्फीली खाइयो से था। ज़रा सी चूक होने पर मौत सामने थी। लेकिन इस साहसिक अभियान पर उनके साथ निकले सभी जवानो में जोश था। उन्होंने इस अभियान को पूरा किया।
'माउंट एवरेस्ट' पर जाना खतनाक होने के साथ साथ बहुत खर्चीला भी है। इसके लिये कडा प्रशिक्षण लिये पर्वतरोही ही शामिल होते है। कई बार हादसों में एवरेस्ट पर विजय हासिल करने वाले पर्वतरोहियों की मौत भी हुई है। लेकिन इसके बाद भी इसे फतह हासिल करने का जुनून ऐसा है कि हर बार खतरों से खेलते हुए पर्वतरोही वहा जाते है।
बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेट लवराज ने माउंट एवरेस्ट पर सातवीं बार फहराया तिरंगा
दुनिया की सबसे ऊँची माउंट एवरेस्ट को फतह करने के लिये बीएसएफ ने इस बार भी लवराज धर्मशक्तू को चुना। उन्होंने अपने दल के साथ 30 मार्च 2018 को भारत से नेपाल के लिए कूच किया था। उनकी टीम ने तमाब बाधाओं को पार करके एक बार फिर दुनिया सबसे ऊँची चोटी पर तिरंगा लहरा दिया। देश को उनपर और उनके साथ गये साथियो पर गर्व है।
बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेट लवराज ने माउंट एवरेस्ट पर सातवीं बार फहराया तिरंगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लवराज के इस साहसिक अभियान पर अपने ट्वीटर हेंडिल पर उन्हें शुभकामनाये दी । यह भारत के लिये गौरव की बात है कि दुनिया की सबसे खतरनाक बर्फीली ऊँची चोटी पर लवराज सिंह ने सातवीं बार सफलतापूर्वक फतह करने का भारत का अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया है।