अगर आप भी एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए प्लान कर रहे हैं तो यहां परमिट, चढ़ाई के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और इसकी फीस के बारे में यहां जान लीजिए।
संस्कृति, पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से तैयार की गई यह योजना 2025 से 2029 तक चलेगी ,जो नेपाल के पहाड़ों को साफ रखने के साथ-साथ पर्वतारोहण को सुरक्षित बनाएगी।
भारतीय दूतावास ने बचाव अभियान की सराहना की है और सभी भारतीय पर्यटकों से संपर्क साधा है। एक प्रवक्ता ने कहा, "हमारे नागरिकों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और नेपाल सरकार का सहयोग सराहनीय है।" यह घटना भारत-नेपाल के बीच पर्यटन सहयोग को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करती है।
बर्फीले तूफान के कारण माउंट एवरेस्ट के चीन वाले हिस्से में लगभग 900 लोग फंस गए थे जिनमें सैकड़ों पर्वतारोही शामिल थे। लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा था जिसके बाद अब सभी को बचाव टीमों ने सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।
तिब्बत के माउंट एवरेस्ट क्षेत्र में आए भयंकर बर्फीले तूफान में लगभग 1,000 पर्वतारोही फंस गए है। पर्वतारोहियों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है।
शेरपा तेनजिंग नोर्गे ने एडमंड हिलेरी के साथ 1953 में माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया था। उनकी जिंदगी संघर्ष, साहस और सफलता की मिसाल है, जिसने उन्हें दुनिया भर में प्रेरणा का प्रतीक बना दिया।
माउंट एवरेस्ट पर 31वीं बार चढ़ाई कर इस शख्स ने अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया। वे 8,849 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचे और अब तक सबसे ज्यादा बार एवरेस्ट फतह करने वाले पर्वतारोही बन गए हैं।
CISF में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर तैनात गीता ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी यानी माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रच दिया।
मोहन रावत ने 18 मई को तड़के माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई पूरी की और नीचे उतरने से पहले करीब 15 मिनट शिखर पर बिताए। उन्होंने इससे पहले भी कई पर्वतों की चोटियां फतह की है। वह 2018 मिशन गंगा अभियान का हिस्सा थे, जिसे प्रधानमंत्री ने हरी झंडी दिखाई थी।
इस हवाई अड्डे का नाम सर एडमंड हिलेरी और शेरपा तेनजिंग नोर्गे के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने 1953 में पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा था। हिलेरी ने इस क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसमें इस हवाई अड्डे का निर्माण शामिल है, जो 1964 में शुरू हुआ था।
माउंट एवरेस्ट पर 40 पर्वतारोहियों ने चढ़ाई की है। पर्वतारोहियों के समूह में 8 चीनी नागरिक, एक अमेरिकी और एक जापानी नागरिक के अलावा 12 पर्वतारोही गाइड शामिल थे।
नेपाल में माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए इस बार 114 अभियानों को अनुमति मिली है। इसमें 75 भारतीय भी इस मिशन पर जाएंगे।
माउंट एवरेस्ट चढ़ना हर पर्वतारोही का सपना होता है। हर साल हजारों पर्वतारोही इसी उम्मीद में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ने की प्लानिंग करते हैं लेकिन अब यह आसान नहीं होने वाला है। चलिए आपको पूरी बात बताते हैं साथ ही एवरेस्ट की तस्वीरें भी दिखाते हैं।
चीन ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आए भूकंप के बाद एहतियातन बड़ा कदम उठाया है। चीन ने पर्यटकों के लिए माउंट एवरेस्ट के अपने हिस्से के इलाकों को बंद कर दिया है। माउंट एवरेस्ट का उत्तरी भाग तिब्बत में स्थित है।
नेपाल के जानेमाले पर्वतारोही मिंगमा जी शेरपा ने 8,000 मीटर से ऊंची सभी 14 चोटियों को बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के फतह किया है। मिंगमा को अब उनके इस कारनामे के लिए सम्मानित किया गया है।
डॉली चायवाला का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तहलका मचा रहा है। जिसमें डॉली एक प्राइवेट जेट में सफर करते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने माउंट एवरेस्ट भी देखा।
आज भारत, नेपाल और न्यूजीलैंड में एवरेस्ट डे मनाया जा रहा है। पर क्या आपको पता है कि ये दिन क्यों मनाया जाता है?
दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर लोगों की भीड़ इस कदर इकट्ठा हुई कि वहां जाम लग गया। सोशल मीडिया पर माउंट एवरेस्ट पर जुटी भीड़ का वीडियो इन दिनों खूब वायरल हो रहा है।
नेपाली मूल के पर्वतारोहियों ने इस साल धमाल मचा रखा है। नेपाल के दिग्गज पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने हाल ही में 30बीं बार माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई कर रिकॉर्ड बनाया था। अब नेपाली मूल की महिला पर्वतारोही ने बड़ा कारनामा कर दिखाया है।
कामी रीता शेरपा ने माउंट एवरेस्ट पर रिकॉर्ड 30 बार चढ़ाई की है। शेरपा की उम्र 54 साल हो चुकी है। कामी रीता साल 1994 से पहाड़ों की चढ़ाई कर रहे हैं।
संपादक की पसंद
लेटेस्ट न्यूज़