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NHAI का अनोखा प्लान: हाईवे किनारे लगेंगी नीम, करंज, महुआ की कतारें; 40 लाख पेड़ों से बदलेगा पर्यावरण का नक्शा!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Feb 18, 2026 08:41 am IST,  Updated : Feb 18, 2026 08:42 am IST

देश में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा और अनोखा कदम उठाया गया है। NHAI ने राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ‘बी कॉरिडोर’ विकसित करने की घोषणा की है। यह पहल सिर्फ सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होगी, बल्कि मधुमक्खियों और अन्य परागणकर्ताओं के संरक्षण पर केंद्रित होगी।

हाईवे किनारे बनेंगे...- India TV Hindi
हाईवे किनारे बनेंगे ‘बी कॉरिडोर’ (सांकेतिक तस्वीर) Image Source : NHAI

अब देश के नेशनल हाईवे सिर्फ गाड़ियों की तेज रफ्तार के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण बचाने की नई पहल के लिए भी जाने जाएंगे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने पहली बार ‘बी कॉरिडोर’ बनाने का फैसला किया है। इसके तहत हाईवे के किनारे ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, जो मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों के लिए फायदेमंद हों। इससे प्रकृति का संतुलन बेहतर होगा और पर्यावरण को मजबूती मिलेगी।

अब तक हाईवे के किनारे ज़्यादातर सजावट के लिए पौधे लगाए जाते थे। लेकिन ‘बी कॉरिडोर’ योजना में ऐसे पेड़-पौधे लगाए जाएंगे जिनमें पूरे साल अलग-अलग समय पर फूल खिलें। इससे मधुमक्खियों को सालभर रस और पराग मिलता रहेगा। इससे मधुमक्खियों की संख्या और सेहत बेहतर होगी, जो खेती और फलों-सब्जियों की पैदावार के लिए बहुत जरूरी हैं।

कौन-कौन से पेड़ लगाए जाएंगे?

इस योजना में नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सिरिस जैसे देशी पेड़ लगाए जाएंगे। इनके साथ झाड़ियां, जड़ी-बूटियां और घास भी उगाई जाएंगी। सूखी लकड़ी और खोखले पेड़ों के तनों को भी नहीं हटाया जाएगा, ताकि मधुमक्खियों और दूसरे परागण करने वाले जीवों को रहने की जगह मिल सके।पेड़ों और पौधों का चुनाव इस तरह किया जाएगा कि हर मौसम में कुछ न कुछ फूल खिलते रहें और पूरे साल हरियाली बनी रहे।

हर 500 मीटर से 1 किमी पर हरित क्लस्टर

NHAI के फील्ड ऑफिस देशभर में ऐसे हाईवे सेक्शन चिन्हित करेंगे, जहां लगभग 500 मीटर से 1 किलोमीटर के अंतराल पर फूलदार पेड़ों के क्लस्टर विकसित किए जा सकें। यह दूरी मधुमक्खियों की औसत भोजन खोजने की सीमा के अनुरूप रखी जाएगी। वित्त वर्ष 2026-27 में NHAI करीब 40 लाख पेड़ लगाने की योजना बना रहा है, जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत ‘बी कॉरिडोर’ के तहत होंगे। प्रत्येक फील्ड ऑफिस को कम से कम तीन ऐसे कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य दिया गया है।

पर्यावरण और कृषि को मिलेगा लाभ

इस पहल से प्रकृति में अलग-अलग तरह के पौधों और जीवों की संख्या बढ़ेगी और मधुमक्खियों जैसे कीड़ों को फूलों से पराग इकट्ठा करने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे फसलों में बेहतर परागण होगा और खेती की पैदावार भी बढ़ सकती है।

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