म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) आज निवेश की दुनिया का सबसे चर्चित और पसंदीदा तरीका बन चुका है। हर महीने छोटी-छोटी रकम निवेश कर लंबे समय में बड़ा कॉर्पस तैयार करने का सपना लाखों लोग देख रहे हैं। लेकिन SIP की लोकप्रियता के साथ कई ऐसे मिथक भी जुड़े हैं, जो निवेशकों को गलत उम्मीदों और गलत फैसलों की ओर ले जा सकते हैं। अगर इन भ्रमों को समय रहते नहीं समझा गया, तो आपकी पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग प्रभावित हो सकती है।
1. SIP से हमेशा और तुरंत मिलेगा ऊंचा रिटर्न?
कई लोग मान लेते हैं कि SIP शुरू करते ही हर साल शानदार और स्थिर रिटर्न मिलना तय है। जबकि हकीकत यह है कि SIP कोई गारंटीशुदा स्कीम नहीं है। इसका फायदा लंबे समय और अनुशासन में छिपा है। बाजार के उतार-चढ़ाव, फंड का चुनाव और निवेश की अवधि ये सभी रिटर्न को प्रभावित करते हैं। असली ग्रोथ आमतौर पर 7-10 साल या उससे ज्यादा समय में दिखती है।
2. जितने ज्यादा फंड, उतना ज्यादा फायदा?
कुछ निवेशक सोचते हैं कि 8-10 फंड में SIP शुरू कर देना समझदारी है। लेकिन इससे पोर्टफोलियो खराब हो सकता है और कई फंड में समान शेयर होने से ओवरलैप बढ़ जाता है। बेहतर है कि 3-5 अच्छे और विविध श्रेणी के फंड चुनें, जिन्हें अपने वित्तीय लक्ष्यों से जोड़ा जाए।
3. SIP कभी बंद नहीं करनी चाहिए?
यह भी एक आम भ्रम है। जिंदगी में परिस्थितियां बदलती रहती हैं। इनकम में उतार-चढ़ाव, आपात स्थिति या लक्ष्य में बदलाव आने पर SIP को रोका या बदला जा सकता है। कई एएमसी SIP पॉज करने की सुविधा भी देती हैं। जरूरत पड़ने पर फंड बदलना भी समझदारी हो सकती है।
4. बाजार गिरते ही SIP बंद कर दें?
बाजार में गिरावट देखकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन यही समय SIP के लिए अवसर बन सकता है। कम NAV पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं, जिससे औसत लागत घटती है। जब बाजार सुधरता है, तो यही एक्स्ट्रा यूनिट्स बेहतर रिटर्न देती हैं।
5. SIP खुद ही मुनाफा दिला देती है?
SIP कोई निवेश प्रोडक्ट नहीं, बल्कि निवेश का तरीका है। असली रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि पैसा किस म्यूचुअल फंड में लगाया गया है। फंड का प्रदर्शन, रणनीति और जोखिम स्तर समझे बिना निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।



































