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EXPLAINER: नसीमुद्दीन के सपा में जाने से बिगड़ा किसका सियासी खेल? जानें दिग्गज मुस्लिम नेता के पाला बदलने के बाद बने नए समीकरणों का गणित

 Reported By: Ruchi Kumar, Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Feb 15, 2026 05:40 pm IST,  Updated : Feb 15, 2026 05:40 pm IST

Nasimuddin Siddiqui Joins SP: मुस्लिमों के दिग्गज नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में शामिल होने के साथ ही सियासी बाजार में चर्चा चल पड़ी है कि क्या अखिलेश यादव ने मुस्लिम मतदाताओं को एकजुट करने के लिए बड़ा दांव चल दिया है। समझिए इसके पीछे की पूरी रणनीति।

nasimuddin siddiqui sp- India TV Hindi
नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में जाने से PDA मजबूत होने के संकेत मिल रहे हैं। Image Source : @SAMAJWADIPARTY/X

Akhilesh Yadav Politics: कद्दावर मुस्लिम नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी आज (रविवार को) साइकिल पर सवार हो गए। अखिलेश यादव की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। यूपी में 2027 के विधानसभा चुनाव के पहले अखिलेश यादव अपने पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले यानी पीडीए को और मजबूत कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के बड़े मुस्लिम चेहरे माने जाने वाले आजम खान अभी जेल में हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि अखिलेश यादव को बड़े मुस्लिम चेहरे की जरूरत महसूस हो रही थी। यूपी में करीब 19 फीसदी मुस्लिम वोट हैं। सपा, कांग्रेस, बीएसपी और AIMIM, उसे अपनी तरफ करने में जुटे हुए हैं। इस बीच, नसीमुद्दीन को पार्टी में लेकर अखिलेश यादव ने बड़ा दांव चला है।

सपा की तरफ क्यों बढ़ा मुस्लिमों का झुकाव?

जान लें कि असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी AIMIM, यूपी में 200 सीट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। हाल में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी 29 सीटों पर खड़ी हुई और 5 सीट जीत भी गई। कांग्रेस और बीएसपी के कमजोर होने से बड़ी तादाद में मुस्लिम वोट अखिलेश यादव को ही मिल रहा है। एक सर्वे के मुताबिक, 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को 79 फीसदी मुस्लिम वोट मिला, बसपा को 6 फीसदी और कांग्रेस को 3 फीसदी। 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन यानी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन को 92 फीसदी मुस्लिम वोट मिला और मायावती को सिर्फ 5 फीसदी।

नसीमुद्दीन सिद्दीकी साबित होंगे मजबूत कड़ी

कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव, नसीमुद्दीन सिद्दीकी के जरिए मुसलमानों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं। आज अखिलेश यादव ने कहा कि ओवैसी को अगर यूपी आना है तो वो साइकिल पर सवार होकर आएं, नहीं तो माना जाएगा कि उनके अंडरग्राउंड तार बीजेपी से जुड़े हैं। हालांकि, यूपी में ओवैसी की पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। यूपी में पिछले विधानसभा चुनाव में  AIMIM 95 सीट पर लड़ी और 94 में उनके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।

मायावती सरकार में 4 बार मंत्री रहे नसीमुद्दीन

नसीमुद्दीन सिद्दीकी, यूपी के कद्दावर मुस्लिम नेता माने जाते हैं। बसपा संस्थापक काशीराम के करीबी रहे नसीमुद्दीन 1991 में पहली बार विधायक बने। नसीमुद्दीन मायावती के भी काफी करीबी माने जाते थे। मायावती चार बार यूपी की मुख्यमंत्री बनीं और चारों बार नसीमुद्दीन सिद्दीकी कैबिनेट मंत्री बने। PWD जैसे अहम मंत्रालय उनके पास रहे। मायावती के बाद कैबिनेट में दूसरा नंबर नसीमुद्दीन सिद्दीकी का होता था।

कभी 'मिनी सीएम' कहे जाते थे नसीमुद्दीन

यूपी में मायावती ने 2007 में जब बहुमत की सरकार बनाई तो नसीमुद्दीन सिद्दीकी के पास एक दर्जन से ज्यादा मंत्रालय थे। नसीमुद्दीन, मायावती के इतने करीबी थे कि उन्हें मिनी सीएम तक कहा जाता था। लेकिन 2017 में मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। जिसके बाद नसीमुद्दीन, कांग्रेस में शामिल हो गए। वो कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष थे।

नसीमुद्दीन 1600 कार्यकर्ताओं के साथ सपा में आए

नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अभी 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। पिछले दिनों रायबरेली जाने के लिए राहुल गांधी लखनऊ आए थे। एयरपोर्ट पर राहुल गांधी को रिसीव करने के लिए नसीमुद्दीन को एंट्री नहीं मिली थी और नसीमुद्दीन को एयरपोर्ट से वापस लौटना पड़ा था। नाराज नसीमुद्दीन ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। आज नसीमुद्दीन करीब 1,600 लोगों के साथ समाजवादी में शामिल हो गए।

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