नई दिल्ली: वो दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में से एक हैं। आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर ने अपनी बेटी आरती के नाम लिखे एक खत को लेकर चर्चा में है। चंदा का यह पत्र सुधा मेनन की संकलित किताब 'अपनी बेटियों के लिए प्रख्यात माता-पिता से विरासत पत्र' में छपा है। चंदा ने इस पत्र में बेटी आरती पर फक्र होने की बात कही है। साथी अपनी जिंदगी के कई सारे अनुभव भी साझा किया और कई सुझाव भी दिए हैं। चंदा ने खत में कहा है कि माता पिता के बनाए अनुशासन उनके जीवन में बहुत काम आएं और उसी की बदौलत वह सफलता की ओर बढ़ती गईं। चंदा ने लिखा है कि प्रिय आरती आज मुझे तुमको आगे बढ़ते देख बहुत गर्व हो रहा है। तुम्हारी कामयाबी ने मुझे अपने पुराने दिन याद दिला दिए हैं।
सुधा मेनन द्वारा लिखी किताब "लिगेसीः लेटर्स फ्रॉम एमिनैंट पैरेंट्स टू देयर डॉटर्स" में उनका ये खत प्रकाशित हुआ है जिसे पढ़कर आप भी भावुक हुए बिना नहीं रह पाएंगे। पढ़िए इस ख़त का संपादित अंश -
प्यारी आरती,
जिंदगी के एक रोमांचक सफर की दहलीज़ पर तुम्हें आत्मविश्वास से भरी एक महिला के रूप में खड़े देखकर मुझे बहुत ही गर्व हो रहा है। मैं तुम्हें आगे के सालों में तरक्की और बुलंदियां छूते हुए देखना चाहती हूं।
इस पल को देखकर मुझे मेरा सफर याद आ गया और जिंदगी के सिखाए पाठ भी। जब मैं उन दिनों को याद करती हूं तो मुझे एहसास होता है कि ज्यादातर बातें मैंने अपने बचपन में ही सीख ली थी, खासतौर पर अपने माता-पिता के जरिए। बचपन में जो संस्कार उन्होंने मुझे दिए, वही मेरी मौजूदा जिंदगी को जीने के तरीके में नींव का काम कर रहे हैं। माता-पिता ने हम दो बहनों और भाई को हमेशा बराबरी से बड़ा किया। मेरे दादा-दादी हम तीनों को एक सीख देते थे - यह ध्यान देना जरूरी है कि हमें किस काम से संतुष्टि मिलती है और उसी को हासिल करने में हमें पूरी लगन से जुट जाना चाहिए। इस सीख ने हमें बहुत जल्द ही अपने फैसले लेने के लिए आत्मनिर्भर बना दिया था।
मैं सिर्फ 13 साल की थी जब अचानक दिल के दौरे से पिता की मृत्यु हो गई। एक ही दिन में सबकुछ बदल गया। तीनों बच्चों को संभालने की जिम्मेदारी मां पर गई। तब हमें एहसास हुआ कि वह कितनी मजबूत हैं। उन्होंने टेक्सटाइल डिजाइनिंग का काम सीखा और छोटी सी कंपनी में नौकरी करने लगीं। परिवार को अकेले चलाना निश्चय ही उनके लिए मुश्किल रहा होगा, लेकिन उन्होंने हमें इस बात का कभी एहसास नहीं होने दिया। जब तक हम आत्मनिर्भर नहीं हो गए, वह मेहनत करती रहीं। मैं नहीं जानती थी कि मेरी मां को अपने आप पर इतना भरोसा है।
एक कामकाजी मां के लिए जरूरी है कि वह अपने काम का असर परिवार पर नहीं पड़ने दे। तुम्हें याद है जब मेरे एमडी और सीईओ बनाने की घोषणा हुई? तब तुम अमेरिका में पढ़ रही थी। तुमने मुझे मेल भेजा। लिखा था, 'तुमने कभी महसूस नहीं होने दिया कि तुम्हारा कैरियर इतना डिमांडिंग और तनाव से भरा है। घर पर तुम सिर्फ मां होती हो।' तुम भी अपनी जिंदगी इसी तरह जीना। (.....शेष अगलेपृष्ठ पर)
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