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चंदा कोचर ने अपनी बेटी को लिखा दिल छू लेने वाला ख़त

वो दुनिया की 100 सबसे ताकतवर महिलाओं में से एक हैं। आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर ने अपनी बेटी आरती के नाम लिखे एक खत को लेकर चर्चा में है। चंदा का यह पत्र सुधा मेनन की संकलित किताब 'अपनी बेटियों के लिए प्रख्यात माता-पिता से विरासत पत्र' में छपा

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मैंने अपनी मां से सीखा था कि कठिन हालात से निपटना और आगे बढ़ना कितना जरूरी है। चुनौतियों से निपटकर और मजबूत बनो, उन्हें खुद पर हावी मत होने दो। मुझे याद है 2008 में कैसे वैश्विक संकट के बाद आईसीआईसीआई बैंक के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा था। तब मैंने बैंक में पैसे जमा करने वालों, निवेशकों, सरकार और रेगुलेटर्स सबसे बात की थी। उन्गें बताया कि बहुत कम पैसा संकट में फंसा है। स्टाफ से कहा कि अगर कोई डिपॉजिटर पैसे निकालने आए तो उससे नरमी से बात करें, उन्हें बिठाएं, पानी पिलाएं। उन्हें समझाएं कि आप जब चाहें पैसे निकाल सकते हैं, लेकिन बैंक संकट में नहीं है।

उन्हीं दिनों तुम्हारे भाई का स्क्वैश टूर्नामेंट था। मैं करीब दो घंटे के लिए वहां थी। बाद में पता चला कि मेरे वहां जाने से बैंक के प्रति ग्राहकों का भरोसा बढ़ा। टूर्नामेंट में आई कई महिलाओं ने मुझसे पूछा कि क्या मैं आईसीआईसीआई बैंक की चंदा कोचर हूं? मैंने कहा, हां। तब उन्हें लगा कि अगर इस संकट की घड़ी में भी मैं टूर्नामेंट के लिए समय निकाल सकती हूं तो इसका मतलब है कि बैंक सुरक्षित हाथों में है।

मैं ऑफिस के साथ मां और सास-ससुर को भी वक्त देती थी। बदले में उन्होंने भी प्यार और समर्थन दिया। याद रखना, संबंध महत्वपूर्ण होते हैं। उनका ख्याल रखना जरूरी है। किसी से वही व्यवहार करो जिसकी तुम  उनसेअपेक्षा करती हो। मेरे घर से बाहर रहने पर तुम्हारे पिता ने कभी शिकायत नहीं की वर्ना मेरा करियर आगे नहीं बढ़ता। हम दोनों अपने करियर में व्यस्त थे, फिर भी हमने अपने संबंधों का पूरा ख्याल रखा। मुझे विश्वास है कि जरूरत पड़ने पर तुम भी अपने जीवन साथी के साथ वैसा ही करोगी।

मुझे याद है जब तुम्हारी बोर्ड परीक्षाएं होने वाली थीं। मैंने छुट्‌टी ली ताकि तुम्हें परीक्षा हॉल तक ले जा सकूं। लेकिन तुमने कहा कि इतने सालों से तुम अकेले परीक्षा देने की आदी हो गई हो। यह सुनकर मुझे ठेस-सी लगी। फिर यह सोचकर सुकून मिला कि मेरे कामकाजी होने से तुम कम उम्र में आत्मनिर्भर हो गई हो। तुमने छोटे भाई की भी देखभाल की, उसे मेरी कमी महसूस नहीं होने दी। मैंने ऑफिस में भी इस बात को लागू किया है। युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी देती हूं।

मैं भाग्य में विश्वास करती हूं लेकिन मेहनत भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी किस्मत खुद लिखता है। अपनी किस्मत अपने हाथों में लो, जो हासिल करना चाहती हो उसका सपना देखो और उसे अपने हिसाब से लिखो। मैं चाहती हूं कि जिंदगी में आगे बढ़ते हुए तुम एक एक करके सफलता की सीढ़ी पर कदम रखो। आकाश की इच्छा रखो लेकिन उस ओर धीरे धीरे बढ़ो, अपने सफर के हर एक कदम का आनंद लो। यह छोटे छोटे कदम ही सफर को पूरा बनाते हैं।

याद रखना अच्छे और बुरे पल तुम्हारी जिंदगी में बराबरी से शामिल होंगे और तुम्हें दोनों का बराबरी से सामना करना आना चाहिए। जिंदगी में मिले हर एक अवसर का पूरा फायदा उठाओ और हर अवसर, हर चुनौती से कुछ न कुछ सीखो।

-तुम्हारी मां

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