1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. ढाका हमला: जब धार्मिक हैवानियत के बीच ज़िंदा रही इंसानियत

ढाका हमला: जब धार्मिक हैवानियत के बीच ज़िंदा रही इंसानियत

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले में किसी ने अपनी बेटी खोई, मां ने बेटा खोया तो किसी के दोस्त का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। मज़हब के नाम पर बैवानियत का

Faraz Hussain, Ishrat, Tarishi Jain, Ambita Kabeer- India TV Hindi
Faraz Hussain, Ishrat, Tarishi Jain, Ambita Kabeer

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले में किसी ने अपनी बेटी खोई, मां ने बेटा खोया तो किसी के दोस्त का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। मज़हब के नाम पर बैवानियत का नाच करने वाले आतंकियों ने लोगों को ऐसा दर्द दिया है जो ताउम्र नासूर बनकर रिसता रहेगा। कहते हैं कि जब जान के लाले पड़ते हैं तो अपने भी मुंह फेर लेते हैं लेकिन इस हमले में मारे गए लोगों में कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने धर्म को नहीं बल्कि दोस्ती और इंसानियत को तरजीह दी।

फ़राज़ हुसैन और अंबिता कबीर तारिषी जैन के दोस्त थे और अमेरिका में पढ़ाई करते थे। तीनों दोस्त ढाका में छुट्टियां मना रहे थे...शुक्रवार की रात तीनों लोग ढाका के गुलशन इलाके में इसी होली आर्टिजन रेस्तरां में आए थे तभी अचानक आतंकी अलाहू अकबर चिल्लाते हुए घुसे और लोगों को मारना शुरू कर दिया।

Faraz Hussain

आतंकी चुन चुनकर लोगों को मार रहे थे और वो कुरान की आयतें पढ़ने को कह रहे थे जिन्हें आय़तें आती थी उन्हें बक्शा जा रहा था और जिन्हें पढ़ना नही आती थी उन्हें गला रेतकर मारा जा रहा था। तारिषी के दोस्त फ़राज़ को भी आयतें आती थी। वो चाहता तो उसकी जान बच सकती थी लेकिन 20 साल के फ़राज़ ने अपनी दोस्त तारिषि और अंबिता के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी...आतंकियों ने भारत की तारिषी और अमेरिका की रहने वाली अंबिता कबीर को मौत के घाट उतार दिया और फिर फराज को भी मार डाला।

फराज हुसैन ट्रांसकॉम ग्रुप के चेयरमैन लतीफ़ुर्रहमान का पोता था...वो जॉर्जिया से पढ़ाई खत्म करके ढाका छुट्टियां मनाने आया था जबकि 19 साल की अंबिता कबीर ऑक्सफ़ोर्ड कॉलेज ऑफ़ इमोरी यूवनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी।

अगली स्लाइड में देखें इशरत की शहादत

Latest India News