नई दिल्ली: आश्चर्य होगा आपको यह जानकर कि मनुष्य का पहला कैलेण्डर सूर्य या चन्द्रमा से नहीं बल्कि स्त्री के रजस्वला होने की अवधि से बना था। इस पृथ्वी पर जब मनुष्य का जन्म हुआ तो उसने सर्व प्रथम पूर्व दिशा से सूर्य को निकलते देखा और पश्चिम में अस्त होते देखा लेकिन सूर्य तो रोज़ एक जैसा ही होता था सो उसका ध्यान चंद्रमा पर गया जो एक अंधेरी रात के बाद बढ़ना शुरू होता था और फिर एक दिन पूरा गोल दिखाई देने के बाद आकार में छोटा होता जाता था और फिर एक दिन ग़ायब हो जाता था और अँधेरी रात आ जाती थी। इस अवधि को उसने एक महिना माना और ऐसे 12 महीनों का एक वर्ष।
ये भी पढ़े- सिंहस्थ कुंभ: नागा साधु क्यों नही पहनते है कपड़े, उनसे जुड़े कुछ अनजाने तथ्य
रॉबर्ट ग्रेव्स की पुस्तक द ग्रीक मिथ के अनुसार हजारों साल तक मनुष्य इस बात का परीक्षण करता रहा और सूर्य तथा चन्द्रमा के उदय होने अस्त होने और प्रकृति के ऋतु चक्र को ध्यान पूर्वक देखता रहा तब उसने जाना कि –
1- चाँद का एक दिन सूर्य के पूरे एक दिन ( सूर्योदय से सूर्यास्त ) के बराबर नहीं होता।
2- सूर्य के 365 दिन होते हैं और चाँद के सूर्य की तुलना में 354 दिन हाँ।
3- लेकिन इससे भी पहले जब मातृसत्तात्मक व्यवस्था थी तब साल तेरह महीने का होता था और यह स्त्री के रजस्वला होने की अवधि के अनुसार होता था अर्थात 28 गुणित 13 = 364 दिन।
4- यह गणना सूर्य पर ही आधारित थी और बारह पूर्ण चंद्रमा की गणना के बाद उसमे दस दिन और जोड़े जाते थे। 365 वे दिन रानी अपने लिए एक पवित्र राजा का चयन करती थी और उससे सम्बन्ध स्थापित करने के पश्चात् उसकी बलि चढ़ा दी जाती थी।
अगली स्लाइड में पढ़े और दिलचस्प बातों के बारें में
Latest India News