8- इसी के साथ कुछ सभ्यताओं में सूर्य से भी गणना प्रारंभ हो गई और चाँद से वर्ष की गणना कुछ सभ्यताओं के धार्मिक कार्यों में जारी रही , शेष सभी जगह सूर्य के दिनों की गणना से 365 दिन का वर्ष माना गया ।
9- इसे एडजस्ट करने के लिए ( 365- 354.253 something = 10.345 ) अर्थात यह शेष बचे दस , सवा दस दिन मिलकर तीन साल में 30 दिन हो जाते हैं इसलिए हर तीन साल बाद एक माह जोड़ा गया। आप देखते होंगे कि हिन्दू धर्म में हर तीन साल बाद एक अधिक मास या खर मास जोड़ दिया जाता है और फिर सारे त्यौहार ऋतुओं के अनुसार चलने लगते हैं।
10- अगर ऐसा न करते तो चाँद और सूर्य के कैलेण्डर बराबर नही चलते हालंकि हिजरी कैलेण्डर में ऐसा नहीं किया गया सो वह 354 दिनों का ही रहा .. सो ईद हर साल 10 दिन कम होती चली जायेगी। वह हिजरी कैलेण्डर पर आधारित है।
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