चीन ने दूसरी ओर 2014 में 60 से अधिक नौसैनिक जहाजों और विमानों को तैनात किया। इतनी ही तैनाती 2015 में भी होने की उम्मीद है।
भारतीय नौसेना के पास 141 जलयान हैं, जिसमें से 127 जहाज और 14 पनडुब्बियां हैं। चीन की नौसेना के पास 300 जलयान हैं, जिनमें जहाज, पनडुब्बियां, एंफीबियस शिप, प्रक्षेपास्त्र से लैस निगरानी विमान हैं।
चीन के पास अभी 59 पारंपरिक पनडुब्बियां और नौ परमाणु शक्तिचालित पनडुब्बियां हैं। इन नौ में से पांच परमाणु हमला करने में सक्षम हैं और चार बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र हमला करने में सक्षम हैं।
परमाणु शक्ति युक्त पनडुब्बियां दो किस्मों की हैं। हमलावर (एसएसएन) और फ्लीट बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र पनडुब्बी (एसएसबीएन)।
भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी 1988 में रूस से किराए पर ली गई थी, जिसे 1991 में वापस कर दिया गया था।
नौसेना में अभी मौजूद आईएनएस चक्र को अमेरिका को छोड़कर शेष दुनिया में सबसे घातक पनडुब्बियों में शुमार किया जाता है।
नौ अन्य सिंधुघोष श्रेणी की पनडुब्बियां हैं, जो रूस के सहयोग से निर्मित हैं। चार अन्य पनडुब्बियां जर्मनी के सहयोग से बनी शिशुमार श्रेणी की पनडुब्बियां हैं।
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