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पनडुब्बी के मामले में भारत चीन से है पीछे !

नई दिल्ली: चीन की एक युआन श्रेणी की एक पनडुब्बी हाल में हिंदमहासागर और अरब सागर से होते हुए पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर पहुंची थी और कुछ समय बिताने के बाद वह वापस चीन

आने वाले वर्षो में भारत 15 पनडुब्बियों की तैनाती करना चाहता है। इनमें छह फ्रांस के सहयोग से बनी पारंपरिक पनडुब्बियां, छह अन्य परमाणु हमला करने में सक्षम होगी और तीन अन्य परमाणु बैलेस्टिक प्रक्षेपास्त्र पनडुब्बियां होंगी।

फ्रांस द्वारा डिजाइन की हुई स्कोर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी बनाने की परियोजना को परियोजना-75 नाम दिया गया है। इस परियोजना के तहत प्रथम आईएनएस कलवारी की तैनाती 2016 तक तथा पांच अन्य की तैनाती 2020 तक होगी।

पहली स्वदेश निर्मित परमाणु शक्ति चालित रणनीतिक पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को 2009 में लांच किया गया था। अभी इसका परीक्षण चल रहा है।

एक अन्य स्वदेश निर्मित आईएनएस अरिधमन पनडुब्बी भी निर्माणाधीन है। तीसरे पर काम शुरू होने वाला है।

चीन की पनडुब्बी क्षमता से पार पाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 14 जुलाई 2015 को एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसके तहत अमेरिका से चार और पी-81 लांग रेंज एंटी सबमैराइन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट खरीदा जाएगा।

ऐसे छह विमान भारत के पास पहले से हैं।

भारत अमेरिकी कंपनी सिकोस्र्की एयरक्राफ्ट कारपोरेशन से एक समझौता करने की प्रक्रिया में है, जिसके तहत 16 एस-70बी एएसडब्ल्यू हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे।

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