नई दिल्ली: जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने कहा कि अफजल गुरु उनका आइकन नहीं बल्कि रोहित वेमुला उनका आदर्श है। कन्हैया ने कहा कि राजद्रोह और देशद्रोह में फर्क होता है देशद्रोह कानून का गलत इस्तेमाल ना हो। कन्हैया ने शुक्रवार को जेएनयू कैंपस में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये बातें कही।
जेल से रिहा होने के बाद जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष कन्हैया ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में कन्हैया ने अफजल गुरु के मुद्दे पर अपनी सफाई दी। कन्हैया ने कहा, ‘आतंकी अफजल गुरु मेरा आइकॉन नहीं, रोहित वेमुला मेरा आदर्श है। 29 साल के कन्हैया ने कहा, 'मेरा काम पढ़ना है और उनके लिए लड़ना है जो पढ़ना तो चाहते हैं लेकिन पढ़ने में सक्षम नहीं हैं। लड़ाई लंबी होने की वजह से इस पर कोई जीत का मार्च नहीं बल्कि एकता मार्च हो सकता है।'
जेएनयू को संचालित करने में करदाताओं के पैसे बर्बाद होनेे की टिप्पणियों पर कन्हैया ने कहा, मैं देश के लोगों को बताना चाहता हूं कि उनका पैसा बिल्कुल सही जगह पर निवेश किया जा रहा है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, मैं राष्ट्रवाद का पेटेंट कराने और एबीवीपी एवं समाज के एक तबके की ओर से प्रचारित अखंड भारत की अवधारणा के खिलाफ हूं।
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत पर रिहा हुए कन्हैया कुमार गुरुवार देर शाम जेएनयू कैंपस पहुंचे। देशद्रोह के आरोप में 20 दिन तिहाड़ जेल में रहने के बाद कन्हैया एक बार फिर अपने अंदाज में दिखे। जेएनयू स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कन्हैया ने पीएम मोदी से लेकर आरएसएस पर चुटीले अंदाज में तीखा हमला किया लेकिन किसी बात पर चुप्पी साधी थी तो वो थी कोर्ट से मिली डांट और चल रही कानूनी कार्रवाई पर।
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अपने 50 मिनट के भाषण में कन्हैया ने कहा कि उनका देश के संविधान में पूरा भरोसा है और पूरी उम्मीद है कि बदलाव आकर रहेगा। कन्हैया ने कहा कि जेएनयू विवाद देश के बुनियादी सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश है। अपने भाषण में कन्हैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार, बीजेपी और आरएसएस पर जमकर चुटकी ली और खूब निशाना साधा।
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