मध्यप्रदेश में कुपोषित बच्चों को अंडा दिए जाने की सरकारी योजना पर सियासत तेज
2016 तक कुपोषण के मामले में नंबर वन रहे मध्यप्रदेश में अब कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ियों के जरिए अंडा दिए जाने की सरकार की योजना पर प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है।

भोपाल: 2016 तक कुपोषण के मामले में नंबर वन रहे मध्यप्रदेश में अब कुपोषित बच्चों को आंगनबाड़ियों के जरिए अंडा दिए जाने की सरकार की योजना पर प्रदेश में सियासत शुरू हो गई है। मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश की ट्राइबल इलाकों की आंगनबाड़ियों में कुपोषण रोकने के लिए बच्चों को और गर्भवती महिलाओं को अंडा दिए जाने पर विचार कर रही है लेकिन भाजपा के नेताओं का मानना है अंडे के जरिए सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण कर रही है। भाजपा नेता किसी भी कीमत पर आंगनबाड़ियों में अंडा किए जाने हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार प्रदेश के 89 आदिवासी ब्लॉक की आंगनबाड़ियों में जाने वाले बच्चों के पोषण के लिए उन्हें अंडा देने पर विचार कर रही है। सरकार का मानना है कि कुपोषित बच्चों या गर्भवती मां को अगर अंडा खिलाया जाए तो कुपोषण दूर होता है और बच्चा तंदुरुस्त होता है। महिला बाल विकास मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों में बच्चे कुपोषित हैं वहां अंडे दिए जाएंगे और अंडा मांसाहारी नहीं शाकाहारी होता है।
मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री महिला एवं बाल विकास मंत्रालय इमरती देवी ने कहा कि पहली बात तो अभी विचार है विचार गया रखा है। उन्होनें कहा कि आपने देखा होगा पहले टीवी में चलते थे गर्भवती मां को अगर अंडा दिया, कमजोर बच्चा हो उसको भी अंडा खिलाया, तो इससे दोनों ही तंदुरुस्त होंगे। इमरती देवी ने कहा कि आपने देखा होगा दवाई में हर चीज में होता है मिलावट मंडे मंडे को मांसाहारी तो नहीं समझा जाता अंडा शाकाहारी में आता है नहीं मुख्यमंत्री जी की हमने नहीं सुनी आवे उनकी हम कैसे कह दें आपस में हम यह सवेरा विचार बना रहे थे जिस क्षेत्र में ऐसा नहीं पूरी आंगनबाड़ी में जिस क्षेत्र में बच्चे ज्यादा कुपोषित हैं उन क्षेत्र में उन बच्चों को जो बच्चे कुपोषित हैं उनको अंडे दिए जाएं।
उन्होनें कहा बीजेपी तो यही चाहती होगी कि कांग्रेस की सरकार में कुपोषिण बहाना हो जाए। मध्यप्रदेश में हम चाहते हैं कि हम अपने बच्चों को सुकौशिक करें जिससे मध्य प्रदेश में बच्चे जल्दी से जल्दी कुपोषण से दूर हो।
मध्यप्रदेश में 2016 तक देश के सबसे कुपोषित राज्य के तौर पर माना जाता था। 2019 में भी मध्यपदेश देश के 3 सबसे कुपोषित राज्यों में से एक है। ऐसे में सरकार ने मध्य प्रदेश को कुपोषण मुक्त करने के लिए बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए प्रोटीन का बेहद जरूरी स्त्रोत समझे जाने वाले अंडे को आंगनबाड़ियों में बांटने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय 2018 की रिपोर्ट
- मध्यप्रदेश में 97 हजार आंगनबाड़ियां।
- इनमें तकरीबन 70 लाख बच्चे।
- ट्राईबल इलाकों में 23 हजार आंगनवाड़ी।
- सरकार की मंशा ट्राईबल इलाकों कि इन आंगनबाड़ियों के 18 लाख बच्चों को अंडे बांटे जाए।
- महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में जनवरी 2016 से जनवरी 2018 के बीच 57 हजार बच्चों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ा।
- औसत आंकड़ा हर दिन 78 बच्चों की मौत
- पूरे प्रदेश में मध्य प्रदेश में सर्वाधिक 42.8 फीसदी बच्चे कुपोषित तकरीबन 45 लाख बच्चे कुपोषण का शिकार है।
जाहिर है 45 लाख से ज्यादा कुपोषित बच्चों के कुपोषण से निपटने के लिए बेहद जरूरी है कि सरकार जरूरी कदम उठाए यही वजह है सरकार ने अंडा बांटने का निर्णय लिया है। सरकार के इस कदम का स्वागत कुपोषण के मामलों के एक्सपर्ट करते नजर आ रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब मध्यप्रदेश में कुपोषण से निपटने के लिए सरकारों के सामने अंडा बेचने का उपाय सामने आया है। 15 सालों तक सत्ता में रही बीजेपी की शिवराज सरकार में भी अंडा बेचने की बात आई थी। लेकिन तब धर्म और संस्कृति की दुहाई देकर सरकार अंडा बांटने से बचते नजर आए।ऐसे में अब जबकि कमलनाथ सरकार को कुपोषण से निपटने का उपाय अंडे में नजर आ रहा है तो बीजेपी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। कह रही है इसके जरिये कमलनाथ सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण करना चाहती है।