पुलिस की सोच से कई गुना आगे था कातिल
जय का कत्ल हो चुका था। ये राज दोस्त अजय और उसके साथियों के सीने में दफन था और यहां तो कातिल दोस्त ही हमदर्द बनकर जय के परिवारवालों के साथ खड़ा था। घड़ियाली आंसू बहा रहा था। दूर-दूर तक अजय पर शक की कोई वजह नहीं थी। होती भी क्यों दोनों पक्के दोस्त जो थे। तो क्या जय की हत्या का राज खुला सका। क्या कातिल दोस्त की साजिश से पर्दा उठा।
साजिश की बिसात पर चली जा रही हर चाल पुलिस की सोच से कई गुना आगे थी। 28 जुलाई को जय के घरवालों ने गुमशुदगी का केस दर्ज कराया था। पुलिस जय का सुराग तलाशने में जुट गई। रिश्तेदारों से लेकर दोस्तों से पूछताछ की गई, लेकिन कोई क्लू नहीं मिला। उसका मोबाइल भी स्विच ऑफ था, लेकिन 31 जुलाई की शाम तक पूरा मामला पलट गया।
कत्ल को देना चाहा किडनैपिंग की शक्ल लेकिन...
भाई के मोबाइल की एक SMS आया। मैसेज भेजने वाले का जो नाम फ्लैश हुआ। उसे देखकर घरवालों ने राहत की सांस ली, लेकिन जैसे ही मैसेज पढ़ा गया। भाई के पैरों तले जमीन खिसक गई। आखिर वो नंबर किसका था। मैजेस में क्या लिखा था
वो नंबर बेटे जय का था, लेकिन उसके नंबर से किडनैपर ने मैसेज भेज था। जिसने जय को रिहा करने की कीमत पूरे 25 लाख बताई गई यानी 25 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। घरवालों को जो आशंका सता रही थी। इस मैसेज ने उसे हकीकत में बदल दिया। लेकिन ये चाल दोस्त अजय की थी। जो दोस्त की लाश पर SMS के जरिए फिरौती मांग रहा था। दरअसल तफ्तीश में जुटी पुलिस को गुमराह करने के लिए SMS भेजा था। वो भी जय के मोबाइल नंबर से। अभी तक कातिल दोस्त का हर दांव एकदम सही पड़ रहा था और जांच टीम पूरे मामले में उलझ कर रह गई।
फिरौती का SMS आते ही पुलिस और भी चौकन्नी हो गई। जांच टीम ने तमाम प्रोफेशनल गैंग की लिस्ट खंगालनी शुरू कर दी। कई संदिग्घों को थाने लाकर पूछताछ की गई, लेकिन तफ्तीश के पहिए जैसे कीचड़ में फंस चुके थे। जांच का पहिया घूम तो रहा था, लेकिन आगे बढ़ने की बजाय अपनी जगह पर धंसता जा रहा था।
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