नई दिल्ली: स्वामी आत्मस्तनंद के बारे में भले ही बहुत लोगों ने ना सुना हो पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनहें बहुत करीब से जानते हैं। 95 साल के स्वामी आत्मस्तनंद कोई और नहीं बल्की ख़ुद नरेंद्र मोदी के गुरू हैं, जिनसे वे 2 दिन के दौरे पर कोलकाता में 9 मई को मिलेंगे।
स्वामी आत्मस्तनंद मशहूर बेलूर मठ के प्रमुख हैं। 1966 में स्वामी राजकोट के रामकृष्ण आश्रम आए थे। उस समय मोदी युवा थे और स्वामी विवेकानंद के जीवन से काफी प्रभावित थे। तब मोदी स्वामी से मिलने और उनके साथ आश्रम में रहने आए थे। कुछ दिन स्वामी के साथ आश्रम में बिताने के बाद मोदी ने उन्हें बताया कि वह भी संन्यासी बनना चाहते हैं। लेकिन स्वामी ने उनसे कहा कि वह संन्यास लेने के लिए नहीं बने हैं। वैसे भी राजकोट आश्रम संन्यासी बनने की दीक्षा नहीं देता था। स्वामी ने मोदी से कहा कि अगर वह सचमुच संन्यासी बनना चाहते हैं तो उन्हें बेलूर मठ जाना होगा।
स्वामी ने बेलूर मठ के तत्कालीन मठाधीश माधवानंद को इस बारे में चिट्ठी भी लिखी थी। संयोग से स्वामी माधवानंद ने भी मोदी की अर्जी ठुकरा दी। उन्होंने मोदी से कहा कि वह लोगों की खातिर काम करने के लिए बने हैं न कि संन्यास के लिए। इसके बाद मोदी अपने गुरु आत्मस्तनंद के साथ राजकोट लौट आए और आरएसएस की सदस्यता ले ली। इसके बाद वह राजनीति में उतरे।
Latest India News