बीते दिसंबर को निहाल को बॉस्टन के प्रोजेरिया रिसर्च फाउंडेशन में भेजा गया था। जहां उसे कैंसर की दवा के लिए क्सिनिकल परिक्षण से गुजरना पड़ा। डॉक्टरों को आशा है कि उसकी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। इस बात का तो पता नहीं है कि वह कब तक जी पाएगा लेकिन उसके पास जीतना भी समय बचा है वह उसमें अपने सारे सपनों को पूरा करना चाहता है जैसे की वह डिजनीलैंड जाना चाहता है और होंड़ा के asimo रोबोट से भी मिलना चाहता है।
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