मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना और ग्वालियर के साथ ही आगरा, इलाहाबाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। मीडिया पर जो वीडियो दिखाए गए हैं, उनसे स्पष्ट है किस तरह से स्थानीय नेताओं ने निहित स्वार्थ के लिए सोमवार को भारत बंद के दौरान हिंसा और आगजनी को बढावा दिया। इस दौरान अफवाहों को हवा देनेवाले व्हाट्स ऐप पर पूरी तरह से सक्रिय थे।
यूपी पुलिस ने मीडिया को बताया कि किस तरह से स्थानीय स्तर पर नेताओं ने हिंसा को भड़काने के लिए षडयंत्र रचा। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट क्यों सक्रिय नहीं थी। अगर लोकल इंटेलिजेंस यूनिट सक्रिय होती तो पुलिस समय पर कदम उठा सकती थी।
मैं समाज के सभी वर्गों से यह अपील करना चाहता हूं कि वे बदले की भावना से बचें और बेहद संयम से काम लें। अगर कुछ लोगों ने हिंसा को भड़काने का काम किया तो पुलिस ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। बदले की कार्रवाई से माहौल और खराब हो सकता है । ये वक्त का तक़ाज़ा है कि पूरे माहौल को शांत बनाए रखा जाए।
यह साफ है कि इस हिंसा के पीछे वोट बैंक की राजनीति मुख्य मकसद रहा और ज्यादातर राजनीतिक दल इस मकसद के लिए काम कर रहे थे। सबको पता है कि चुनाव के दौरान टिकट जातिगत समीकरणों के आधार पर बांटे जाते हैं । जाति के नाम पर टिकट बांटना और वोट मांगना कुछ हद तक सहन किया जा सकता है लेकिन जाति के नाम पर हिंसा भड़काना किसी तरह से स्वीकार्य नहीं है । यह अक्षम्य है और एक बड़ा अपराध है।
सभी राजनीतिक दलों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि वे किस दिशा में देश को ले जा रहे हैं। एक तरफ हमारे पास अनियंत्रित भीड़ हिंसा फैला रही है वहीं दूसरी तरफ पुलिस को यह निर्देश दिए जा रहे हैं कि वह हालात को काबू में करने के लिए आंसू गैस, लाठीचार्ज और फायरिंग नहीं करे। अगर पुलिस ने अधिकतम बल प्रयोग किया होता और कई जानें चली जातीं जिससे हालात बिगड़ सकते थे। (रजत शर्मा)
Latest India News