लखनऊः उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने सोमवार को कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता का स्थान संविधान में भले ही नहीं है, पर व्यावहारिक रूप में यह चौथे स्तंभ के रूप स्थापित है। जनता की आवाज उठाना ही असली पत्रकारिता है। राज्यपाल सोमवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित विश्व पत्रकारिता दिवस व देवर्षि नारद जंयती के अवसर पर 'पत्रकार धर्म व चुनौतियां' विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि अपने विचार प्रकट कर रहे थे।
नाईक ने कहा, "पत्रकारिता का उद्देश्य सामने आना चाहिए, खबरें देना व सच खबरें देना पत्रकारिता का धर्म है, पत्रकारिता देशहित के लिए होना चाहिए। चौथे स्तंभ के धर्म व चुनौतियों पर चर्चा सामयिक है। धर्म कर्तव्य से जुड़ा है, जैसे पुत्र धर्म, राजधर्म, शिक्षण धर्म है, ठीक वैसे ही पत्रकारिता धर्म है। खबरों का सही मूल्यांकन व उस हिसाब से उसकी प्रस्तुति पत्रकार धर्म है।" उन्होंने कहा कि शब्दों को सही अर्थो में लिखें तो पाठक का भी ज्ञानवर्धन होगा, पत्रकारों को सही, सच खबर व उसका सटीक विश्लेषण प्रस्तुत करना चाहिए, यही पत्रकारिता का धर्म है।
राज्यपाल ने कहा कि पहले लोग साप्ताहिक अखबार इस नाते खरीदते थे कि उसमें संपादकीय रहता था। लोकमान्य तिलक को संपादकीय लिखने के कारण सात साल का कारावास भुगतना पड़ा था। राज्यपाल ने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान समय में लोगों में विचार देने व पढ़ने की रुचि समाप्त हो रही है।
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इससे पहले, धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री, राज्यसभा सांसद ने सामाजिक बदलावों के परिप्रेक्ष्य में वर्तमान पत्रकारिता में सुधार की बात कही। उल्लेखनीय है कि इस मौके पर पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल ने पत्रकारिता के कुछ नामी लोगों को सम्मानित किया गया।
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