नई दिल्ली: मध्यप्रदेश में एशिया के सबसे पुराने जंक्शन पर जबलपुर से नैनपुर के बीच दौड़ने वाली छोटी लाइन की ट्रेन के चक्के हमेशा के लिए थम गए। इस आखिरी सफर में जब लोगों को बैठने की जगह नहीं मिली तो वो छत पर सवार हो गए।
इस यादगार सफर के सैकड़ों यात्री गवाह बने। जैसे ही दोपहर 12 बजे नैरोगेज लाइन पर ट्रेन पहुंची, लोगों में ट्रेन पर चढ़ने की होड़ लग गई। करीब आधा घंटे बाद ट्रेन नैनपुर रवाना हो गई। इसके साथ ही 112 साल पुराना सिलसिला खत्म हो गया।
जबलपुर नैनपुर और नैनपुर बालाघाट लाइन पर मेगा ब्लाक लगाया गया है। दूसरे चरण में 1 नवंबर से नागपुर छिंदवाड़ा, नैनपुर मंडल फोर्ट रेलवे लाइन को बंद कर दिया जाएगा।
लोगों को इस बात की खुशी तो है कि बड़ी लाइन के लिए काम शुरू हो जाएगा, लेकिन इस बात का दुख भी है, कि उनकी प्यारी छुकछुक ट्रेन अब नजर नहीं आएगी। मुसाफिरों के मुताबिक नैरोगेज लाइन के ट्रेन से सफर करने पर कम किराया लगता था, लेकिन अब बस वाले तीन गुना ज्यादा किराया वसूलेंगे।
छोटी लाइन की विरासत को जिंदा रखने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे ने जबलपुर से शिकारा तक हैरिटेज ट्रेन चलाने की घोषणा की थी, लेकिन इस प्रस्ताव पर अब तक कोई पहल नहीं हो सकने के कारण इसे बंद करने का निर्णय ले लिया गया है।
एशिया की सबसे बड़ी नैरोगेज लाइन अगली स्लाईड में......
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