इस रात को लगने वाले बाजारों पर सख्त ऐतराज जताते हुए मुफ्ती मुकर्रम ने कहा, बाजारों में मेले की तरह दुकाने लगाना भी गलत है, क्योंकि यह इबादत की रात सबके लिए है और जो दुकानें लगाते हैं यह रात उनके लिए भी है। इसलिए इस रात का यह मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि दुकानें लगे या बाजार मेले की तरह हों, बल्कि बाजार में किसी को होना ही नहीं चाहिए। यह आमदनी और कमाई की रात नहीं है यह दीनी कमाई की रात है।
बीते कुछ सालों में सड़कों पर हुड़दंग जरूर कम हुआ है लेकिन अब भी कई युवा ऐसे हैं जो ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं। इस रविवार 22 मई को शब-ए-बरात है। जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने कुछ युवकों द्वारा हुड़दंग मचाने पर चिंता जाहिर करते हुए कहा, शब-ए-बरात में स्टंटबाजी करना इस रात की अहमियत के खिलाफ है। यह इबादत की रात है न कि हुड़दंग और स्टंट की। यह कानूनन और शरियत के हिसाब से भी मुनासिब नहीं है।
उन्होंने कहा, मां-बाप को इस पर ध्यान देना चाहिए। यह उनके लिए भी परेशानी का सबब है क्योंकि इससे हादसे भी होते हैं। उन्हें अपने बच्चों पर काबू करना चाहिए और उन्हें बाहर नहीं जाने देना चाहिए। इमाम बुखारी ने कहा, आप शोर मचाते हुए गैर मुस्लिमों के मोहल्ले से गुजर रहे हैं। इसके लिए कौन कहता है, न कानून कहता है और न इस्लाम कहता है।
फतेहपुरी मस्जिद के इमाम मौलाना मुफ्ती मुकर्रम ने कहा, शब-ए-बरात को पैगंबर मोहम्मद के वक्त से मनाया जाता रहा है और मोहम्मद साहब की शिक्षाओ में 15वीं शाबान इस्लामी महीना को इबादत के लिए फरमाया गया है और अल्लाह इस रात को दुआओं को कुबूल करता है और अल्लाह की तरफ से इसका एलान होता है। इस रात में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगना, और अपने गुनाहों की तौबा करनी चाहिए।
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