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फीस के लिए पिता को किया बेइज्जत, बेटी ने लगा ली फांसी

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में स्कूल की फीस एक बच्ची के लिए मौत का फंदा बन गई। 3 महीने से लड़की के पिता ने स्कूल की फीस नहीं जमा की थी। जिसकी वजह से स्कूल प्रिंसिपल और टीचरों ने बच्ची के सामने उसके पापा को थप्पड़ मारा। जानइए आगे क्या हुआ।

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नई दिल्ली:  सुनकर आपको हैरानी हो सकती है कि जो बच्ची स्कूल में पढा़ई करके एक अफसर बनने का सपना देख रही थी। उसे स्कूल की वजह से ही अपनी जान देनी पड़ी। खुदकुशी करनी पड़ी।

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एक 14 साल की छोटी सी लड़की अपने पिता की बेइज्जती नहीं देख पाई और सुसाइड कर लिया। उसके पापा का कसूर सिर्फ इतना था कि वह अपनी बेटी के स्कूल की फीस नहीं दे पा रहा था। जिसके कारण स्कूल के टीचर जिन्हें बच्चों को दुनियादारी का पाठ पढ़ाने को कहा जाता हैं। उन्होंने उस बच्ची के पिता को उसी के सामने थप्पड़ मारा। जो कि बेटी सह न पाई और फांसी के फंदे में झूल गई। ये घटना है दिल्ली से सटे गजियाबाद की। जानिए आखिर ऐसा क्यों किया इस 14 साल की बच्ची ने।

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में स्कूल की फीस एक बच्ची के लिए मौत का फंदा बन गई। 3 महीने से लड़की के पिता ने स्कूल की फीस नहीं जमा की थी। जिसकी वजह से स्कूल प्रिंसिपल और टीचरों ने बच्ची के सामने उसके पापा को थप्पड़ मारा। बदसलूकी की और पुलिस के साथ थाने भिजवा दिया। वो बच्ची अपने पापा की बेइज्जती से इस कदर सदमे में आई कि घर में ही फांसी लगाकर जान दे दी।  

कौन हैं ये बेटी, जिसने सुनी दर्दनाक मौत
दिल्ली से सटे गाजियाबाद की रहने वाली जैस्मीन तोमर की दास्तां बेहद दर्दानाक है। इतनी दर्दनाक की आपको आंखें भी नम हो सकती हैं। जैस्मीन पढ़ाई में होशियार थी, लेकिन 3 महीने से स्कूल की फीस नहीं चुका पाने की वजह से उसके पापा के साथ जो कुछ हुआ। उसे वो मासूम बर्दाश्त नहीं कर सकी और फांसी लगा ली।

घर में आ धमके स्कूल के टीचर, किया पिता से बदसूलकी
बात बुधवार दोपहर की है। जैस्मीन घर पर थी। तभी डीएसपी पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल और पांच टीचर नंदग्राम में जैस्मीन के घर पहुंचे। बकाया फीस की वसूली के लिए। जैस्मीन ने फौरन अपने पापा को फोन करके बुलाया, लेकिन पापा के घर में दाखिल होते ही प्रिंसिपल ने बेटी की आंखों के सामने पापा को थप्पड़ मार दिया। जैस्मीन के पापा रतन सिंह तोमर मिन्नतें करते रहे कि वो फीस चुका देंगे, लेकिन प्रिंसिपल उसी वक्त फीस वसूल करने की जिद पर अड़ गई। जब रतन ने कहा कि अभी उनके पास पैसे नहीं हैं तो खुद के साथ छेड़खानी की आरोप लगाते हुए, गिरफ्तार करवाने की धमकी देने लगी।

जैस्मीन के पिता ने सुनाया पूरा हाल
जैस्मीन के पापा का कहना है कि लाख मिन्नतों और मान मनव्वौल के बाद भी प्रिंसिपल नहीं मानी। उनकी बेटियों के सामने ही उल्टी सीधी बातें करती रहीं। यहां तक की जैस्मीन और उसकी छोटी बहनों से भी मारपीट की गई। ये बच्चे प्रिंसिपल और टीचर्स की बदसलूकी खुद बता रहे हैं।

पूरे परिवार का साथ मारपीट करने के बाद आखिरकार प्रिंसिपल ने पुलिस को बुलवाकर छेड़खानी के इल्जाम में रतन सिंह को थाने भिजवा दिया। पापा की बेइज्जती 14 साल की जस्मीन ने अपनी आंखों से देख रही थी। उसका मन कचोटने लगा कि फीस नहीं देने की वजह से उसके पापा के साथ ये सब हुआ। जैसे ही पुलिस घर से निकली।जैस्मीन के खुद को कमरे में बंद कर लिया।

छोटी बहन ने देखा बहन को फांसी लगाते
इससी छोटी बहन ने खुद देखा कि दीदी ने गले में चुन्नी का फंदा लगा लिया है, लेकिन उस वक्त न तो घर में पापा थे और न ही मम्मी। जब तक ये कुछ सोच पाते जिल्लत से टूट चुकी जैस्मीन कमरे की खिड़की पर फंदे से लटक गई।

इस कारण प्रिंसिपल थी नराज, जो बनी जैस्मीन की मौत की वजह
दरअसल जैस्मीन उसकी दो बहनें और एक छोटा भाई इसी डीएसपी पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। लेकिन पिछले 3 महीने से जैस्मीन के पिता बच्चों की फीस नहीं जमा कर सके थे। नौकरी छूट जाने की वजह से जैस्मीन के पापा के पास फीस के पैसे नहीं थे। फीस देने के लिए बच्चों के पिता ने स्कूल से 2 से 3 महीने की मोहलत मांगी थी। इस बीच चारों बच्चों का दाखिला कम फीस वाले स्कूल में करवा दिया था। स्कूल प्रिंसिपल फीस नहीं देने और बच्चों का नाम कटवाने से नाराज थी।

अब पुलिस के ऊपर उठ रही है उंगलियां
आखिरकार फीस को लेकर जो कुछ हुआ वो जैस्मीन की मौत की वजह बन गई। इस बीच रतन सिंह की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी टीचर्स को पूछताछ के लिए थाने लगे गई। तो वहां लोगों का गुस्सा उन पर फूट पड़ा। उनके साथ थाने में ही महिलाओं ने मारपीट की।

पुलिस ने किसी तरह बीच बचाव कराया, लेकिन सवाल पुलिस की कार्रवाई पर भी उठ रहे हैं। सवाल ये है कि आखिर प्रिंसिपल की झूठी शिकायत पर पुलिस रतन सिंह को थाने क्यों लेकर गई। आखिर मामले की जांच सही से क्यों नहीं की गई, क्योंकि अगर ऐसा होता तो शायद आज जैस्मीन जिंदा होती। उसकी जिंदगी फीस के फंदे में न फंसी होती।

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