बीरभूम: पश्चिम बंगाल में इस साल चुनाव है और बम-बंदूक की गूंज आए दिन सुनाई पड़ रही है। आज बीरभूम में तृणमूल कांग्रेस नेताओं के दो गुटों में जमकर बम और गोली चले जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। पिछले हफ्ते भी बीरभूम में बम धमाके में 2 लोगों की मौत हो गई थी। सवाल उठता है कि बीरभूम, मालदा, मुर्शिदाबाद जैसे इलाक़ों में बार-बार बम धमाके कर विरोधियों पर क्यों हमला होता है।
चुनावी साल, बारूद पर बंगाल
शुक्रवार तड़के कोहरा पूरी तरह छंटा भी नहीं था कि पश्चिम बंगाल के वीरभूम के बाहारी गांव बम धमाकों से थर्रा गया। रिहायशी इलाक़े के पास एक के बाद एक कई धमाके हुए। बताते हैं कि ये धमाके तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के आपसी भिड़ंत का नतीजा है। पिछले दो दिनों से दोनों गुटों में तक़रार चल रही थी, जिसके बाद तनाव कायम था। लेकिन शुक्रवार रात बात बढ़ गई और नतीजा बम धमाके और गोलीबारी तक पहुंच गया जिसमें दो लोगों के मारे जाने की ख़बर है।
मालदा हिंसा के बाद बीरभूम धमाके का सच
कहते हैं कि तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों में बालू के ठेके को लेकर वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी, जिसके बाद ये नौबत आई। दोनों तरफ़ से बम चलने लगे और नकाशपोशों ने हाथों में रायफ़ल उठा लिया। मामला चूंकि तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा है लिहाज़ा गांववालों ने चुप्पी साध ली।
वैसे, तनाव बढ़ने और 2 लोगों की मौत के बाद इलाक़े को पुलिस ने घेर लिया। गांव के साथ-साथ इलाक़े में सघन छापेमारी की गई तो पुलिस को देसी बमों का ज़ख़ीरा हाथ लगा।
'बम फैक्ट्री' की एक्सक्लूसिव पड़ताल
वीरभूम और आस-पास के इलाक़े में ऐसे बम बनाने वाले सैकड़ों हैं। खुलेआम गांव में बम बनते हैं और फिर इसका इस्तेमाल वर्चस्व की लड़ाई के लिए होता है। चुनावी मौसम में ऐसे बम की मांग और बढ़ जाती है।
पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव हैं। सियासी वर्चस्व की जंग तृणमूल और लेफ्ट के बीच ही नहीं बल्कि आरोपों के मुताबिक तृणमूल और बीजेपी के बीच भी है। आलम ये है कि स्थानीय तृणमूल नेताओं के बीच भी ताक़त दिखाने की ज़ोर-आज़माइश तेज़ हो चुकी है। लिहाज़ा पश्चिम बंगाल में एक तरफ़ हिंसा बढ़ी है तो दूसरी तरफ़ सियासत का पारा।
बंगाल में बारुद का सियासी पलीता
खुलेआम बम बना रहे लोग साफ़तौर पर स्वीकार करते हैं कि चुनाव के वक्त ही इन जानलेवा बमों को सबसे ज़्यादा मांग होती है।
पश्चिम बंगाल के वीरभूम इलाक़े में पिछले एक साल के दौरान वर्चस्व की सियासी लड़ाई में जमकर बम का इस्तेमाल हुआ है। इन बम धमाकों में जहां राजनीतिक कार्यकर्ता मारे गए, वहीं पुलिस पर भी जानलेवा हमले हुए। जब-जब छापेमारी हुई, 200 से 300 रुपये में मिलने वाला बम हज़ारों की संख्या में बरामद हुए।
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