एम्स के कमरे में किसने बनाया राजीव गांधी को PM? जानिए
नई दिल्ली: इतिहास में कई वाकये ऐसे होते हैं, जहां सच्चाई परदे में रहती है और तरह-तरह के कयास सत्ता के गलियारों में तैरते रहते हैं। ऐसा ही एक राजनीतिक कयास है कि इंदिरा गांधी
PM पद को लेकर राजीव की आशंका का ज़िक्र
प्रणब मुखर्जी कोई फ़ैसला लेने से पहले राजीव गांधी की राय जानना चाहते थे। सोनिया के साथ आठवीं मंज़िल के कमरे में मौजूद राजीव को अरुण नेहरु समेत कांग्रेस नेताओं की बात बताने के लिए प्रणब मुखर्जी उस कमरे में दाखिल हुए।
‘मैंने धीरे से राजीव के कंधे को छुआ। वो मेरी तरफ़ मुड़े। वो समझ गए कि कोई बहुत ज़रुरी बात होगी, तभी मैं कमरे में आया हूं। वो मुझे लेकर बाथरूम में गए ताकि किसी को हमारी बातों का पता न चले। मैंने उन्हें अरुण नेहरु और कांग्रेस नेताओ की सारी बातें बताईं। मैंने कहा कि मुमकिन है कि ज्ञानी जैल सिंह पहले सीपीपी का नेता चुने जाने की बात कहें। जैल सिंह ये भी कह सकते हैं कि प्रणब मुखर्जी को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया जाए।’
अपनी किताब में प्रणब मुखर्जी की बातों को बड़े ध्यान से राजीव गांधी ने सुना और कहा कि उप राष्ट्रपति के हाथों प्रधानमंत्री पद की शपथ गलत होगा। हमें राष्ट्रपति के आने का इंतज़ार करना चाहिए। राजीव गांधी ने कहा कि वो अरुण नेहरु से बात करेंगे। राजीव गांधी ने ये भी निर्देश दिया कि राष्ट्रपति के हाथों शपथ-ग्रहण की तैयारियां की जाएं।
इंदिरा की हत्या के बाद क्यों डरे राजीव?
ऐसा कहा जाता है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी इस बात के ख़िलाफ़ थीं कि राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। सोनिया ने अपनी आंखों से सामने अपनी सास का अंजाम देखा था । वो राजीव गांधी के लिए ऐसी आशंका से सहमी हुई थीं फिर भी राजीव गांधी ने सोनिया गांधी को तैयार किया। प्रणब मुखर्जी इस बात का ज़िक्र करते हैं कि राजीव के मन में ये आशंका ज़रुर थी।
'टर्बुलेंट इयर्स' में क्या है?
पश्चिम बंगाल के कांटी की सभा के बाद हम कार से कोलकाता लौटे। हमने रेडियो पर बीबीसी ट्यून किया तब हमें पता लगा कि इंदिरा गांधी को 16 गोलियां लगी हैं। राजीव जानना चाहते थे कि गोलियां कितनी घातक हैं। राजीव ने कार में मौजूद अपने पीएसओ यानी सुरक्षा अधिकारी से पूछा वीआईपी की सुरक्षा में लगे गार्ड के पास कितनी घातक गोलियां होती हैं। सुरक्षा अधिकारी ने जवाब दिया कि बहुत घातक होती हैं तब राजीव ने कहा क्या वो इन गोलियों की हक़दार थीं।
तब प्रणब मुखर्जी ने राजीव गांधी को बताया कि रेडियो पर सिर्फ़ गोली लगने की ख़बर है। ये नहीं कहा कि इंदिरा की हत्या हो गई है। बीबीसी के उसी बुलेटिन में बताया गया कि प्रणब मुखर्जी के साथ राजीव गांधी दिल्ली लौट गए लेकिन दोपहर तक राजीव और प्रणब मुखर्जी पश्चिम बंगाल में ही थे।
अगली स्लाइड में पढ़िए- बाबरी कांड पर नरसिम्हा राव के रोल पर सवाल
