नई दिल्ली: 1993 मुंबई बम ब्लास्ट पर एतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोषी याकूब मेमन की क्यूरेटिव पेटिशिन ख़ारिज करते हुए फांसी की बरकरार रखी है। जस्टिस एच.एल. दत्तू, जस्टिस टी.एस. ठाकुर और जस्टिस ए.आर. दवे की बेंच ने ये फैसला सुनाया है। इस वक्त नागपुर सेंट्र जेल में बंद है याकूब मेमन। मुंबई बम ब्लास्ट में 257 लोग मारे गए थे।
राहत के सारे दरवाजे बंद
मेमन के लिए राहत के सारे दरवाजे बंद हो गए हैं। इससे पहले 9 अप्रैल को पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी बरकरार रखी थी, इसके साथ ही उसकी फांसी पर लगी रोक भी हट गई थी। मेमन ने फांसी की सज़ा को उम्र कैद में बदलने की मांग की थी।
याकूब के वकीलों की दलील थी कि वो सिर्फ धमाकों की साजिश में शामिल था न कि धमाकों को अंजाम देने में।
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याकूब की याचिका खारिज होने के साथ ही उसे कभी भी फांसी देने का रास्ता साफ हो गया था क्योंकि पिछले साल राष्ट्रपति उसकी दया याचिका खारिज कर चुके हैं।
इससे पहले 21 मार्च 2013 को सुप्रीम कोर्ट स्पेशल कोर्ट के फांसी की सजा को बरकरार रखने का फैसला सुना चुका है।
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