भारत ने संयुक्त राष्ट्र के स्पेशल रैपोर्टियर के गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम की 'डी-कंपनी' को 'भारत-आधारित' आपराधिक समूह बताए जाने पर लताड़ा। भारत ने यूएन के इस बयान को कड़े शब्दों में खारिज कर दिया है। भारत ने यूएन के द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट को लेकर कहा कि ऐसी बड़ी गलतियां ना करें। इसके साथ ही भारत ने चेतावनी दी है कि इस तरह की अक्षमता से संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था को भारी नुकसान पहुंचता है। भारत ने कहा कि दाऊद इब्राहिम भारत में एक वांछित अपराधी है और संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार, वह उसी देश में रहता है जहां अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन मिला था और मारा गया था। बता दें कि, ओसामा बिन लादेन 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद शहर में अमेरिकी नेवी सील्स (US Navy SEALs) की एक छापेमारी में मारा गया था।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव, रघु पुरी ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में इस दावे का कड़ा खंडन किया। उन्होंने बताया कि सॉल की रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2003 में, सुरक्षा परिषद ने एक आपराधिक समूह भारत-आधारित डी-कंपनी के सरगना को अल-कायदा से जुड़े होने के कारण लिस्ट किया था। अगर इस एक लाइन को अलग से पढ़ा जाए, तो यह असल सच्चाई से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।
रघु पुरी ने क्या कहा?
दाऊद इब्राहिम की 'डी-कंपनी' को 'भारत-आधारित' बताए जाने को सिरे से खारिज करते हुए पुरी ने कहा कि यह आपराधिक संगठन और इसका सरगना दाऊद इब्राहिम, 1993 से ही भारत में आतंकी हमलों के मामलों में वांछित था। मेरा प्रतिनिधिमंडल अन्य मंचों पर भी इस बात को लेकर अपनी गंभीर चिंता जताता रहा है कि विशेष प्रतिवेदक (SR) तथ्यात्मक रूप से गलत रिपोर्ट जारी करते हैं, और इसके लिए उन्हें कभी जवाबदेह नहीं ठहराया जाता। मैं मेरे देश से जुड़ी कुछ बहुत बड़ी गलतियों की ओर ध्यान दिलाना चाहूंगा।"
अल कायदा को लेकर भारत का जवाब
पुरी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 'अल-कायदा प्रतिबंध व्यवस्था' (Al-Qaeda sanctions regime) का जिक्र करते हुए कहा, "1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध करने के कारणों के विवरण में यह बात स्पष्ट रूप से लिखी गई है। इस तथ्य का जिक्र न करना अफसोसजनक है, और विशेष जनादेश धारकों (special mandate holders) की ऐसी अक्षमता इस संगठन को भारी नुकसान पहुंचाती है। मैं रिकॉर्ड के लिए इसे स्पष्ट कर दूं। यह व्यक्ति 2003 में सूची में शामिल किए जाने से बहुत पहले ही भारत से भाग गया था, और इसी दौरान, देश के बाहर रहते हुए, उसे अल-कायदा और ओसामा बिन लादेन से जुड़े होने के कारण सूची में शामिल किया गया था।"
(इनपुट-पीटीआई)
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