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धर्मस्थला मास बरियल केस: पुलिस ने 2000 से 2015 के बीच दर्ज अज्ञात मौतों के मामलों के प्रमुख रिकॉर्ड नष्ट किए, RTI से खुलासा

धर्मस्थला मास बरियल केस में RTI जांच से पता चला है कि पुलिस ने 2000 और 2015 के बीच दर्ज अज्ञात मृत्यु मामलों के प्रमुख रिकॉर्ड नष्ट कर दिए।

Dharmasthala mass burial case- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT धर्मस्थला मास बरियल केस में खुलासा

बेंगलुरु: धर्मस्थला मास बरियल केस में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। RTI जांच से पता चला है कि बेल्थंगडी पुलिस ने 2000 और 2015 के बीच दर्ज अज्ञात मृत्यु मामलों के प्रमुख रिकॉर्ड नष्ट कर दिए। यह समय-सीमा लगभग पूरी तरह से उस अवधि से मेल खाती है, जिस दौरान एक शख्स ने आरोप लगाया था कि उस पुलिस स्टेशन लिमिट्स में आने वाले धर्मस्थला मंदिर के आस पास कई शव दफनाए गए थे।

कई सवाल हो रहे खड़े

रिकार्ड्स को मिटा दिए जाने की बात सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि शिकायतकर्ता गवाह का दावा है कि 1998 से 2014 के बीच उसे महिलाओं और नाबालिगों के शवों को दफनाने और उनका अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया गया था, जिनमें से कई के शरीर पर, उनके अनुसार, यौन उत्पीड़न के निशान थे।

इस सिलसिले में दायर आरटीआई के तहत दिए गए आवेदन के जवाब में पुलिस ने बताया कि मृतक व्यक्तियों की पहचान का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए पोस्टमार्टम रिपोर्ट, दीवार पर लगाए गए पोस्टर, नोटिस और फोटोग्राफ को नियमित प्रशासनिक आदेशों के अनुसार नष्ट कर दिया गया।

आरटीआई आवेदन में विशेष रूप से दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 174(ए) के तहत 15 वर्षों की अवधि में दर्ज अज्ञात अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों का विवरण मांगा गया था। बेल्थंगडी पुलिस स्टेशन के जन सूचना अधिकारी ने जवाब दिया कि वो रिकार्ड्स अब उपलब्ध नहीं हैं, क्योंकि विभिन्न परिपत्रों और प्रक्रियाओं के तहत उनका निपटान कर दिया गया है।

स्थायी आदेश संख्या 762/759 और 874, साथ ही कर्नाटक वित्तीय संहिता के अभिलेख विनाश प्रक्रिया संख्या 400 का हवाला देते हुए, अधिकारी ने कर्नाटक सरकार सचिवालय की 26 जून, 2013 की एक अधिसूचना और पुलिस अधीक्षक द्वारा 23 नवंबर, 2023 को जारी एक और हालिया आदेश का भी हवाला दिया। पत्र के अंत में कहा गया कि शेष मामलों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

चिंता की बात

कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज समूहों ने इस तरह के विनाश की वैधता और नैतिकता पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि पुलिस थानों को आपराधिक मामलों के रिकॉर्ड, खासकर अप्राकृतिक मौतों से जुड़े रिकॉर्ड, नष्ट करने का अधिकार नहीं है, जिन्हें जनहित में संरक्षित किया जाना चाहिए।

यह कदम विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि दक्षिण कन्नडा जिला डिजिटाइजेशन के मामले में कर्नाटक के सबसे उन्नत जिलों में से एक है। आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि रिकॉर्ड को नष्ट करने से पहले उनका डिजिटलीकरण क्यों नहीं किया गया, खासकर जब उनमें अज्ञात व्यक्तियों की संवेदनशील जानकारी शामिल हो,और जिनके परिवार अभी भी उनकी तलाश कर रहे हों।

कडाबा तालुका के कल्मेथाडका स्थित नीति टीम, जिसने आरटीआई आवेदन दायर किया था, ने जवाब पर निराशा व्यक्त की है और न्याय, पारदर्शिता और प्रभावित परिवारों के अधिकारों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंता जताई है। दूसरी ओर गवाह शिकायतकर्ता की निशानदेही पर धर्मस्थला में खुदाई का काम जारी है। गवाह शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसने 15 अलग अलग जगहों पर कई शवों को दफन किया था।

अब तक SIT ने 13 जगहों को चिन्हित कर 10 जगहों पर खुदाई का काम पूरा कर लिया है लेकिन स्थान नम्बर 6 के अलावा और कहीं से भी मानव अवशेष नहीं मिले हैं, गवाह शिकायत कर्ता के वकील ने सरकार और SIT से अपील की है कि ग्राउंड पेनिट्रेटिंग राडार की मदद से पूरे इलाके को स्कैन करना चाहिये क्योंकि गवाह शिकायतकर्ता ने 2014 में यहां से चला गया था और पहाड़ी इलाका होने और इलाके में भारी बारिश होने के चलते जमीन का खिसक जाना सम्भव है इसीलिए गवाह शिकायतकर्ता की बताई जगह पर अब तक बहुतायत में मानव अवशेष नहीं मिल रहे हैं हो सकता है कि वो जमीन में ज्यादा अंदर धंस गए हों या फिर कहीं और खिसक चुके हों।

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