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Hindi News भारत राष्ट्रीय I-PAC रेड मामले में ED पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, ममता सरकार ने भी दाखिल की कैविएट, कहा- उसका भी पक्ष सुना जाए

I-PAC रेड मामले में ED पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, ममता सरकार ने भी दाखिल की कैविएट, कहा- उसका भी पक्ष सुना जाए

I-PAC रेड मामले में ममता सरकार ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के खिलाफ शुक्रवार को कोलकाता की सड़कों पर पैदल मार्च किया था। अब ED और ममता सरकार दोनों ही सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi Image Source : PTI सांकेतिक तस्वीर

कोलकाता में  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC (Indian Political Action Committee) के कार्यालय और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। इस छापेमारी के बचाव में सीएम ममता बनर्जी भी सड़क पर उतर आईं। वहीं, अब I-PAC मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

ED की जरूरी फाइलें और मोबाइल फोन छीने

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। कोलकाता में I-PAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर रेड के दौरान ममता बनर्जी ने अधिकारियों से जरूरी फाइल छीनी थी। हार्ड डिस्क और मोबाइल फोन भी ले लिए थे।

ED ने की सीबीआई जांच की मांग

ED ने सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 32 के तहत याचिका दायर की है। याचिका में ED ने रेड के दौरान हुए पूरे टकराव (शोडाउन) का जिक्र किया है। ED का कहना है कि राज्य की मशीनरी की वजह से एजेंसी को निष्पक्ष जांच करने से रोका गया। इस मामले में पहले ED ने कलकाता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई 14 जनवरी को होनी है।

ममता सरकार भी पहुंची सुप्रीम कोर्ट

आज ही पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट याचिका दाखिल की है। ममता सरकार ने कहा था कि अगर ED सुप्रीम कोर्ट जाती है तो कोई भी फैसला देने से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए।

क्या है कैविएट याचिका?

बता दें कि कैविएट (Caveat) एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें कोई व्यक्ति कोर्ट को पहले से सूचित करता है कि उसके खिलाफ कोई मुकदमा या अर्जेंट आवेदन आने की आशंका है, ताकि उसके खिलाफ कोई भी एकतरफा आदेश पारित होने से पहले उसे सुनवाई का मौका मिले। 

 नेचुरल जस्टिस का सिद्धांत

कैविएट का उद्देश्य नेचुरल जस्टिस के सिद्धांत को बनाए रखना है। कैविएट याचिका को सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 148A के तहत दायर किया जाता है, ताकि व्यक्ति को कोर्ट में अपनी बात रखने का मौका मिले। 

 

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