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अल फलाह यूनिवर्सिटी के ऑफिस पर ED की छापेमारी, ट्रस्टियों और संस्थानों के ठिकानों पर पड़े छापे

ED ने अल फलाह यूनिवर्सिटी और इसके ट्रस्टियों के ठिकानों पर फंडिंग अनियमितताओं और पुराने आपराधिक मामलों की जांच के तहत छापेमारी की है। इस कार्रवाई में संदिग्ध लेन-देन सहित कई दस्तावेजों की जांच हो रही है।

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Image Source : PTI FILE अल फलाह यूनिवर्सिटी पर ED की छापेमारी हुई है।

नई दिल्ली/फरीदाबाद: प्रवर्तन निदेशालय यानी कि ED ने मंगलवार सुबह 5 बजे से अल फलाह यूनिवर्सिटी के ऑफिस और इससे जुड़े ट्रस्टियों व अन्य लोगों एवं संस्थाओं पर बड़े पैमाने पर छापेमारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, ये छापे यूनिवर्सिटी की फंडिंग और कुछ पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े हैं। ED द्वारा यह छापेमारी अल फलाह यूनिवर्सिटी के ओखला स्थित दफ्तर पर की जा रही है। सूत्रों ने बताया कि ED की टीमें सुबह से ही दिल्ली-NCR में कई जगहों पर तलाशी ले रही हैं। माना जा रहा है कि ED इस मामले में NIA और दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR पर संज्ञान लेते हुए PMLA के तहत कार्रवाई कर रही है।

यूनिवर्सिटी की फंडिंग में अनियमितता के आरोप

अल फलाह यूनिवर्सिटी के मुख्य ऑफिस के अलावा फरीदाबाद और दिल्ली-एनसीआर के कई अन्य जगहों पर ईडी के अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी की फंडिंग में अनियमितता और संदिग्ध लेन-देन की शिकायतों के आधार पर यह कार्रवाई की जा रही है। बता दें कि अल फलाह यूनिवर्सिटी का नाम लाल किले के पास हुए बम धमाकों में शामिल लोगों से भी जुड़ा है और इसमें कई तरह के फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। अल फलाह यूनिवर्सिटी हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित एक प्राइवेट विश्वविद्यालय है, जिसकी स्थापना अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने की थी।

यूनिवर्सिटी के चांसलर का भाई हुआ था अरेस्ट

बता दें कि अल फलाह यूनिवर्सिटी के चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी के छोटे भाई 50 वर्षीय हमूद अहमद सिद्दीकी को मध्य प्रदेश पुलिस ने रविवार को हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया। हमूद पर आरोप है कि उसने कई साल पहले महू कस्बे में लोगों से निवेश के नाम पर करीब 40 लाख रुपये लिए और 20 प्रतिशत ब्याज का लालच दिया। दो साल कंपनी चलाने के बाद तीसरे साल परिवार वह सहित फरार हो गया था। ठगी के 3 पुराने मुकदमों में 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था। हालांकि पुलिस ने बताया कि चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी का ठगी के इन मामलों से कोई लेना-देना नहीं है।

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