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रेलवे के पांच बड़े अफसरों की नौकरी से छुट्टी, लापरवाही बरतने पर जबरन VRS दिया गया

रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने पांच लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई की है। काम में लापरवाही का हवाला देते हुए रेलवे ने पांच बड़े रेल अफसरों को VRS दे दिया गया। जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने ये कदम उठाया है।

रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव - India TV Hindi
Image Source : PTI रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव। फाइल

नई दिल्लीः रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के आदेश पर रेलवे ने इंडियन रेलवे एस्टेब्लिशमेंट कोड के नियमों का इस्तेमाल करते हुए खराब परफॉर्मेंस के कारण पांच अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया। रेलवे की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, रेलवे बोर्ड, रेल मंत्रालय की समीक्षा समितियों ने भारतीय रेलवे स्थापना संहिता, खंड II के नियम 1802 (ए) के अंतर्गत सार्वजनिक हित में पांच समूह 'ए' अधिकारियों की समय से पहले सेवानिवृत्ति की सिफारिश की है, जो मौलिक नियमों के नियम 56 (जे) के बराबर है।

इस वजह से की गई कार्रवाई

समीक्षा समितियों ने आईआरएचएस के दो एसएजी अधिकारियों, उत्तर रेलवे में आईआरएसई के एक जेएजी अधिकारी, उत्तर रेलवे में आईआरएसई के एक अधिकारी और पश्चिम रेलवे में आईआरटीएस के एक जेएजी अधिकारी की समय से पहले सेवानिवृत्ति की सिफारिश की है।

समीक्षा समितियों ने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड का विस्तृत मूल्यांकन किया। समीक्षा में वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर), अखंडता रिकॉर्ड, सतर्कता इनपुट, अनुशासनात्मक इतिहास और उनकी सिफारिशों पर पहुंचने से पहले अन्य प्रासंगिक सेवा रिकॉर्ड की जांच शामिल थी। समितियों ने सर्वसम्मति से संबंधित मामलों में सार्वजनिक हित में अधिकारियों की समय से पहले सेवानिवृत्ति की सिफारिश की। 

जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत हुई कार्रवाई

प्रेस रिलीज में बताया गया है कि भारतीय रेलवे भ्रष्टाचार, ईमानदारी की कमी और अक्षमता के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करता है। सार्वजनिक सेवा में ईमानदारी, अनुशासन और जवाबदेही पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। भारतीय रेलवे स्थापना संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत  की गई कार्रवाई का उद्देश्य इन मूल मूल्यों को बनाए रखना है। 

रेलवे ने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों से उम्मीद की जाती है कि वे मामले को गंभीरता से लें, क्योंकि प्रशासन ने सेवा के ज़रूरी मानकों को पूरा न करने वालों के प्रति अपनी 'ज़ीरो-टॉलरेंस' (सख्त कार्रवाई) की नीति को फिर से दोहराया है।

पहले हुए हैं इस तरह के एक्शन

 

इससे पहले रेलवे ने इसी साल मार्च में भी छह लापरवाह अफसरों को जबरन वीआरएस दे दिया था। जबरन रिटायर किए गए अधिकारियों के पदों में CME/प्रोजेक्ट/HQ, नॉर्दर्न रेलवे; NF-HAG/IRSME, SWR; SAG/ISRE, SECR; SAG/IRSSE, ER; ग्रेड-1 (अंडर सेक्रेटरी/डिप्टी डायरेक्टर), RBSS; और PPS, RBSSS शामिल थे। नियम 1802(a) प्रशासन को जनहित में अधिकारियों को रिटायर करने का अधिकार देता है और यह कदम संकेत देता है कि संगठन के किसी भी स्तर पर खराब प्रदर्शन और अक्षमता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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