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गोवा में INS विक्रांत पर गरज रहे राफेल-M लड़ाकू विमान, नेवल बेस पर फाइनल ट्रायल जारी

राफेल-M (मरीन) भारतीय नौसेना की विमानवाहक पोत आधारित युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय नौसेना गोवा में विमानवाहक पोत INS विक्रांत से राफेल-M लड़ाकू विमानों के ट्रायल कर रही है।

राफेल लड़ाकू विमान- India TV Hindi
Image Source : PTI (FILE PHOTO) राफेल लड़ाकू विमान

भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत INS विक्रांत से गोवा में राफेल-M (मरीन) लड़ाकू विमानों के ट्रायल किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य विमानवाहक पोत से टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए विमानों की क्षमताओं का आकलन करना है। भारत ने फ्रांस के साथ 26 राफेल-M लड़ाकू विमानों की खरीद का करार किया है। इन विमानों में 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। इनकी डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत तक होने की उम्मीद है। राफेल-M के नौसेना के बेड़े में शामिल होने से INS विक्रांत की युद्धक क्षमता मजबूत होगी और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री हवाई शक्ति को नई मजबूती मिलेगी।

भारतीय नौसेना की बढ़ेगी ताकत

राफेल-M फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाया गया कैरियर-आधारित ट्विन-इंजन मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। भारत ने इसे अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए चुना है। इसकी अधिकतम गति लगभग 1.8 मैक है। इसकी लंबाई करीब 15.3 मीटर है और इसमें साफ्रान कंपनी के दो M88 टर्बोफैन इंजन लगे हैं। यह सिंगल-सीटर और ट्विन-सीटर संस्करणों में उपलब्ध है।

राफेल-M की खासियत-

  • राफेल-M की सबसे बड़ी खासियत है एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेशन करने की क्षमता। इसे मजबूत लैंडिंग गियर, विशेष लैंडिंग हुक और मजबूत एयरफ्रेम के साथ तैयार किया गया है, ताकि यह एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भर सके और अरेस्टर वायर की मदद से सुरक्षित लैंडिंग कर सके। भारत इसे INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोतों से संचालित करने की योजना बना रहा है। इसके लिए भारतीय कैरियरों के साथ इसकी संचालन संबंधी परीक्षण महत्वपूर्ण हैं।
  • राफेल-M में थेल्स कंपनी का RBE2 AESA रडार लगा है। यह हवाई और सतह के लक्ष्यों का पता लगाने तथा उन्हें ट्रैक करने में मदद करता है। इसके साथ SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी है, जो रडार और अन्य खतरों की पहचान, चेतावनी और इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स में सहायता करता है। इससे दुश्मन की हवाई सुरक्षा के बीच विमान की जीवित बचने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
  • हथियारों की बात करें तो राफेल परिवार में Meteor और MICA जैसी एयर-टू-एयर मिसाइलें महत्वपूर्ण हैं। Meteor बियॉन्ड विजुअल रेंज में दुश्मन के लड़ाकू विमान को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है, जबकि MICA भी हवाई युद्ध में अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा SCALP जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-सरफेस क्रूज मिसाइल और 30 मिलीमीटर की तोप भी राफेल परिवार की प्रमुख क्षमताओं में शामिल हैं। उपयुक्त कॉन्फिगरेशन में एंटी-शिप हथियारों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। हालांकि, इन सभी हथियारों को भारतीय नौसेना के राफेल-M पैकेज में शामिल मानने से पहले अनुबंध और ऑपरेशनल प्रमाणन की स्थिति देखना जरूरी है।
  • राफेल-M हवा में ईंधन भरने में भी सक्षम है। इससे मिशन की अवधि और परिचालन पहुंच बढ़ाई जा सकती है। आधुनिक सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और नेटवर्क आधारित क्षमताओं के जरिए यह समुद्र में हवाई सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों के खिलाफ कार्रवाई और लंबी दूरी के मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत-फ्रांस में 63,000 करोड़ रुपये की डील

भारत और फ्रांस के बीच 28 अप्रैल 2025 को लगभग 63,000 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इसके तहत भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-M विमान खरीदे जाने हैं, जिनमें 22 सिंगल-सीटर लड़ाकू विमान और चार ट्विन-सीटर प्रशिक्षण विमान शामिल हैं। समझौते के अनुसार, विमानों की डिलीवरी 2030 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

कुल मिलाकर, राफेल-M भारतीय नौसेना की विमानवाहक पोत आधारित युद्धक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसकी वास्तविक ऑपरेशनल क्षमता भारतीय कैरियरों के साथ सफल अनुकूलता, उपलब्ध हथियारों और नौसेना के अन्य प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण पर निर्भर करेगी।

वहीं, आपको बता दें कि हाल ही में उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बियों का पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम युद्धपोत 'मंगरोल' को नौसेना में शामिल कर लिया गया है। भारतीय नौसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है।

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