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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, ईडी की याचिका खारिज की

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है और कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।

Siddaramaiah- India TV Hindi
Image Source : PTI/FILE सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को सुप्रीम कोर्ट से राहत

नई दिल्ली: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। ईडी की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की है। बता दें कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने पार्वती के खिलाफ जारी ED के समन को रद्द कर दिया था इसलिए हाईकोर्ट के फैसले को ईडी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

क्या है मामला?

मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) द्वारा प्लॉट आवंटन के मामले में  ED ने पार्वती को पूछताछ के लिए समन भेजा था, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट में पार्वती की ओर से दलील दी गई थी कि उन्होंने सभी 14 प्लॉट को सरेंडर कर दिया था, और उनके पास न तो कोई 'तथाकथित अपराध आय' थी और न ही वे इसका उपभोग कर रही थीं।

सीजेआई ने प्रवर्तन निदेशालय को कड़ी फटकार लगाई

सीजेआई बी आर गवई ने सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी में कहा, "राजनीतिक लड़ाइयां जनता के बीच लड़ी जानी चाहिए। ईडी का इस तरह इस्तेमाल क्यों हो रहा है? मुख्य न्यायाधीश गवई ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से कहा, "राजू साहब, हमें बोलने के लिए मजबूर मत कीजिए। नहीं तो हमें ईडी पर कुछ कड़े शब्द कहने पड़ेंगे। कोर्ट ने साफ कर दिया कि जांच एजेंसी का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अंत में, सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की अपील को खारिज कर दी।"

मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) प्लॉट आवंटन मामला क्या है?

मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) प्लॉट आवंटन मामला एक कथित घोटाले से संबंधित है, जिसमें मैसूर में भूमि आवंटन और अधिग्रहण में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इस मामले ने विशेष रूप से कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी पत्नी पार्वती को लेकर विवाद पैदा किया है। 

MUDA ने 2020 में एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें भूमि अधिग्रहण के बदले जमीन मालिकों को 50:50 अनुपात में वैकल्पिक भूखंड आवंटित करने की नीति थी। इसका मतलब था कि अधिग्रहित जमीन के बदले मालिकों को विकसित लेआउट में समान या आधा क्षेत्रफल आवंटित किया जाएगा।

इस योजना के तहत कई लोगों को भूखंड आवंटित किए गए, लेकिन नियमों का उल्लंघन कर प्रतिष्ठित क्षेत्रों जैसे विजयनगर, दत्तागल्ली, जेपी नगर, और आरटी नगर में भूखंड दिए गए, जिससे बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे।

आरोप है कि सिद्धारमैया की पत्नी पार्वती को 2021 में 3.16 एकड़ जमीन के बदले विजयनगर जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र में 14 आवासीय भूखंड आवंटित किए गए, जो कथित तौर पर नियमों के खिलाफ था।

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