केरल के एर्नाकुलम के फोर्ट कोच्चि में मौजूद एक अहम हेरिटेज लैंडमार्क, कोडर हाउस, मंगलवार को लगी भीषण आग में जलकर खाक हो गया, जिससे इस बीच-टाउन में अफरातफरी मच गई। मूल रूप से 1808 में बनी यह इंडो-पुर्तगाली शैली की लाल ईंटों वाली हवेली टॉवर रोड पर स्थित है और कोच्चि की यहूदी विरासत का हिस्सा है। इसे बाद में एक लग्जरी बुटीक होटल के तौर पर चलाया जा रहा था।
मेहमानों और कर्मचारियों को बाहर निकाला गया
सामने आई जानकारी के अनुसार, ये आग शाम करीब 7 बजे इस कई मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिलों में से एक में लगी और जल्द ही बाकी हिस्सों में फैल गई। फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के सूत्रों के मुताबिक, आग की लपटें दिखते ही कुछ मेहमानों और कर्मचारियों को इमारत से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, टावर रोड स्थित ईंट से बनी लाल रंग की ये तीन मंजिला इमारत में कभी प्रमुख यहूदी कोडर परिवार का घर था।
क्या थी इस इमारत की खासियत?
दरअसल, पुर्तगाली हवेली के तौर पर बनी इस इमारत (कोडर हाउस) को 1905 में सैमुअल एस. कोडर ने खरीदा और इसका रेनोवेशन करवाया। कोडर कोच्चि के एक जाने-माने यहूदी परिवार से थे और नीदरलैंड के मानद वाणिज्य दूत (ऑनररी कॉउन्सल) थे। यह इमारत कोडर परिवार के पास ही रही, जब तक कि तीसरी पीढ़ी ने इसे बेच नहीं दिया। यह हेरिटेज इमारत समुद्र के नजारे वाले बड़े कमरों, लकड़ी के फर्श और लकड़ी पर नक्काशीदार फर्नीचर के लिए जानी जाती है। आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली में हल्दीराम आउटलेट में भी आग लग गई थी। इस दौरान 30 लोग अंदर फंस गए थे।
कितना नुकसान हुआ?
फोर्ट कोच्चि में मौजूद कोडर हाउस को यहूदी विरासत की पहचान के तौर पर देखा जाता था। इमारत की वास्तुकला में यूरोपीय और भारतीय शैलियों का मिश्रण देखने को मिलता था। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है। घटना के तुरंत बाद फोर्ट कोच्चि और आसपास के सेंटरों से फायर ब्रिगेट और बचाव कर्मी मौके पर पहुंचे और आग को बुझाया। आग लगने के कारण अब तक कितना नुकसान हुई है, इस बात का पता तत्काल नहीं लग पाया है।
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