शिमला-मनाली से लेकर नैनीताल तक महाजाम, कैंची धाम में पैर रखने की जगह नहीं; वीकेंड पर लगी पर्यटकों की भारी भीड़
वीकेंड पर लंबी छुट्टी होने की वजह से पहाड़ी शहरों में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। लोगों को रहने के लिए होटल नहीं मिल रहे हैं। वहीं सड़कों पर लंबे-लंबे जाम लगे हुए हैं। लोग घंटों से जाम में फंसे हुए हैं।

शिमला/देहरादून: वीकेंड पर पड़ोसी राज्यों के लोग पहाड़ों का रुख कर रहे हैं। इस बीच हिमाचल से लेकर उत्तराखंड तक प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यहां हर जगहों लंबे-लंबे जाम देखने को मिल रहे हैं। हिमाचल का कुल्लू-मनाली, शिमला हो या उत्तराखंड का नैनीताल हर जगह पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। इस वीकेंड पर बाहरी राज्यों से भारी संख्या में पर्यटक पहाड़ों की तरफ आए हैं। एक तरफ रोहतांग पर पड़ रहे बर्फ के फाहे, दूसरी तरफ लाहौल स्पीति की ठंडी फिजाएं, हर किसी को मनाली आने पर विवश कर देती हैं। मगर मनाली में अचानक आने बाले मेहमान, जांम में भी फंस जाते हैं। मनाली से सोलांग घाटी मार्ग हो या हिडिम्बा देवी सड़क मार्ग, सबपर रह रहकर जाम लग रहा है।
हजारों की संख्या में शिमला पहुंचे पर्यटक
वहीं राजधानी शिमला में भी पर्यटन सीजन के बीच ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को शोघी बैरियर से कुल 16,277 वाहन शिमला पहुंचे। इनमें करीब 7,060 वाहन बाहरी राज्यों के थे। आंकड़ों के मुताबिक सामान्य दिनों में भी करीब 10 हजार वाहन प्रतिदिन शिमला पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह में शिमला पहुंचने वाले वाहनों की संख्या करीब 70 से 80 हजार तक पहुंच रही है। इनमें लगभग 50 फीसदी वाहन बाहरी राज्यों के बताए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में वाहनों के शहर में प्रवेश करने से प्रमुख सड़कों और पर्यटन स्थलों के आसपास ट्रैफिक दबाव बढ़ रहा है।
15 मिनट के सफर में लग रहे 1 से 2 घंटे
शिमला पहुंच रहे पर्यटकों को भी ट्रैफिक जाम से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पर्यटकों का कहना है कि शहर में प्रवेश करने के बाद माल रोड तक पहुंचने में 1 से 2 घंटे तक लग रहे हैं, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह सफर करीब 15 से 20 मिनट में पूरा हो सकता है। ट्रैफिक जाम के कारण पर्यटकों का काफी समय सड़कों पर ही गुजर रहा है।
ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील
वहीं शिमला के डीएसपी ट्रैफिक चंद्रशेखर ने स्थानीय लोगों, पर्यटकों और वाहन ऑपरेटरों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिमला पुलिस लगातार ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाने और शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रयास कर रही है। वाहन चालक नियमों का पालन करें और पुलिस का सहयोग करें, ताकि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
नैनीताल में पर्यटकों की उमड़ी भीड़
वहीं उत्तराखंड की बात करें तो वीकेंड के चलते नैनीताल, भीमताल, कैंची धाम समेत कुमाऊं के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से हल्द्वानी से नैनीताल और भीमताल जाने वाले मार्गों पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। शुक्रवार से ही नैनीताल रोड पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। जाम की वजह से पर्यटकों को कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में भी घंटों का समय लग रहा है।
दिल्ली से आए कुछ पर्यटकों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अगर आधे घंटे का सफर चार से छह घंटे में पूरा हो रहा है तो ऐसे में पर्यटन स्थल तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। कुछ पर्यटकों ने यहां तक कह दिया कि वे अब भीमताल की तरफ दोबारा आने से भी बचेंगे। नैनीताल में पर्यटकों से सड़कों पर रात गुजारी है। बस स्टैंड रिक्शा स्टैंड से लेकर जिसको जहां मिला कहीं रात गुजारने को मजबूर हो गया है। अगर किसी को खोजकर होटल मिल भी रहा है तो 1000 का कमरा 12 हजार का दिया जा रहा है।
कैंची धाम में पैर रखने की जगह नहीं
वहीं नैनीताल के कैंची धाम में आस्था सैलाब उमड़ रहा है। कैंचीधाम एक बार फिर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया है। नीब करौरी धाम में भक्तों का तांता लग गया है। हांलाकि पर्यटकों के आने से न सिर्फ धार्मिक पर्यटन को रफ्तार मिली है, बल्कि हल्द्वानी से लेकर कैंचीधाम और नैनीताल से लेकर कालाढूंगी तक पर्यटन कारोबार में भी उछाल आया है।
हालांकि पुलिस प्रशासन की ओर से हल्द्वानी शहर से लेकर भीमताल और नैनीताल तक प्रमुख यातायात बिंदुओं पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद पर्यटकों की भारी आमद के कारण कई स्थानों पर लंबा जाम लग रहा है। वीकेंड के चलते पूरे देश से पर्यटक नैनीताल जिले की ओर पहुंच रहे हैं, जिससे सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पर्यटन सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। (इनपुट- जितेन ठाकुर, कपिल ठाकुर और भूपेंद्र रावत)
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