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'PFI भारत में शरिया राज स्थापित करना चाहता था', NIA कोर्ट ने 21 के खिलाफ आरोप किए तय

NIA की विशेष अदालत ने PFI से जुड़े 21 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने कहा कि संगठन भारत में शरिया आधारित व्यवस्था स्थापित करने और देश के खिलाफ साजिश में शामिल था। आरोपियों पर UAPA समेत कई धाराओं में मुकदमा चलेगा और अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

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Image Source : PTI REPRESENTATIONAL NIA की स्पेशल कोर्ट ने PFI से जुड़े 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।

नई दिल्ली: पटियाला हाउस कोर्ट की विशेष NIA अदालत ने 'पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया' से जुड़े 21 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इन 21 आरोपियों में PFI के चेयरमैन ओ. एम. ए. सलाम और वाइस चेयरमैन ई.एम. अबूबकर के नाम भी शामिल हैं। यह मामला आतंकी साजिश और देश के खिलाफ गंभीर अपराधों से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने आरोप तय करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से यह गंभीर संदेह पैदा होता है कि आरोपी PFI और उसकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद के माध्यम से मिलकर भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश में शामिल थे।

भारत में शरिया राज लाना चाहता था PFI

कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके साथ ही 2047 तक या उससे पहले भारत में शरिया कानून आधारित इस्लामिक खिलाफत स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, जिसे राज्य के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के जरिए पूरा करने की बात कही गई। अदालत के मुताबिक, यह भी सामने आया है कि 'विजन 2047' नाम का दस्तावेज PFI का ही था। कोर्ट ने कहा कि इस दस्तावेज में हिंदू नेताओं को निशाना बनाने और इराक व सीरिया के आतंकी संगठन ISIS को समर्थन देने जैसे निर्णय शामिल थे, जो PFI की राष्ट्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठकों में लिए गए थे।

PFI के सदस्यों के खिलाफ हैं गंभीर आरोप

स्पेशल NIA कोर्ट ने यह भी कहा कि यह गतिविधियां आरोपियों के व्यक्तिगत काम नहीं थीं, बल्कि यह सब PFI के ‘मास्टरमाइंड्स’ के जरिए संगठित तरीके से किया गया था। इस मामले में ई.एम. अबूबकर समेत 20 अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ भी आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, UAPA के तहत आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाने, आतंकी गतिविधियों की साजिश, टेरर कैंप चलाने और सदस्यों की भर्ती जैसे गंभीर आरोप तय किए गए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी, जिसमें सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा।

2022 में सरकार ने PFI को किया था बैन

बता दें कि सितंबर 2022 में NIA ने देश के अलग-अलग हिस्सों से इन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब पूरा मामला ट्रायल के अगले चरण में पहुंच गया है, जहां अदालत आरोपों और सबूतों की विस्तृत जांच करेगी। बता दें कि PFI एक विवादित संगठन है जिस पर देश में बैन लगा हुआ है। यह संगठन 2006 में बना था और इसका मुख्यालय केरल में था। इसके खिलाफ देशभर में कई गंभीर आरोप लगे, जिनमें अवैध फंडिंग, हिंसक गतिविधियों की साजिश और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप शामिल हैं। 2022 में केंद्र सरकार ने इसे UAPA के तहत प्रतिबंधित कर दिया था।

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