ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। जून 2024 में बीजेपी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने पर 41 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि 91 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बंद कर दी गई है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को भुवनेश्वर में आयोजित 'सतर्कता जागरूकता सप्ताह-2026' कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के तहत एक IAS अधिकारी और मुख्य अभियंता स्तर के आठ अधिकारियों समेत कई सरकारी अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए गए हैं।
भ्रष्टाचार के मामलों में बढ़ी दोषसिद्धि दर
सीएम माझी ने बताया कि वर्ष 2025 में भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि की दर 50 प्रतिशत थी, जो इस साल सितंबर तक बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि ओडिशा सतर्कता विभाग की इस उपलब्धि की सराहना की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल नीतियां और योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और सरकारी धन को वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचाना भी है।
516 मामले दर्ज, 537 आरोपी गिरफ्तार
ओडिशा के सतर्कता निदेशक यशवंत कुमार जेठवा ने विभाग की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए बताया कि 12 जून 2024 से 26 अक्टूबर 2026 के बीच कुल 516 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में 890 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें 134 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। इस अवधि में कुल 537 अधिकारियों और अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि सतर्कता विभाग ने इस दौरान आय से अधिक संपत्ति के मामलों में 332 करोड़ रुपये की संपत्ति का पता लगाया।
तकनीक के जरिए भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार का जनसुनवाई कार्यक्रम जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सरकार अब लोगों की समस्याएं सुनने और उनका समाधान करने के लिए सीधे जनता तक पहुंच रही है। सीएम माझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन धन-आधार-मोबाइल (JAM) व्यवस्था की सराहना करते हुए दावा किया कि तकनीक के इस्तेमाल से जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार खत्म करने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी धन के दुरुपयोग और हेराफेरी पर रोक लगी है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए ओडिशा आईटी नीति को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार की आशंका वाले क्षेत्रों की पहचान करने और भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल लोगों का पता लगाने के लिए 'प्रिवेंटिव विजिलेंस रिसर्च विंग' भी बनाया गया है।
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