हरियाणा के नारायणगढ़ के पास नेशनल हाईवे से 13 फुट लंबे और करीब 93 किलोग्राम वजनी विशालकाय अजगर को रेस्क्यू किया गया। वंदे मातरम् दल के सदस्य भरत की अगुवाई में वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के सहयोग से चलाए गए इस अभियान में टीम को करीब दो घंटे तक कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद अजगर को सुरक्षित रूप से पंचकूला के मोरनी क्षेत्र के जंगलों में छोड़ दिया गया। इससे पहले, मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी रेलवे स्टेशन पर झाड़ियों से निकलकर पटरी पार कर रहा 10 फीट लंबा अजगर तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट आकर दो टुकड़ों में कट गया और उसकी मौत हो गई।
"अजगर का आकार काफी बड़ा था"
वंदे मातरम् दल के सदस्य भरत ने बताया कि अजगर का आकार काफी बड़ा था और उसका वजन भी अधिक था। अजगर के भारी वजन और आक्रामक व्यवहार को देखते हुए पूरी टीम ने विशेष सावधानी बरती। अजगर को सुरक्षित तरीके से पकड़ना टीम के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। रेस्क्यू के दौरान पूरी सावधानी, सूझबूझ और आपसी तालमेल के साथ काम किया गया, ताकि अजगर को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे और अभियान को सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सके।
करीब 30 साल बताई जा रही अजगर की उम्र
रेस्क्यू किए गए विशालकाय अजगर की उम्र करीब 30 साल बताई जा रही है। इसकी लंबाई लगभग 13 फुट और वजन 93 किलोग्राम होने के कारण इसे दल के अब तक के सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियानों में से एक माना जा रहा है। वंदे मातरम् दल की ओर से इसे हरियाणा के सबसे बड़े रेस्क्यू ऑपरेशनों में से एक बताया गया है।
वर्ष 2012 से अब तक 1,300 से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन
भरत के अनुसार, वंदे मातरम् दल वर्ष 2012 से वन्यजीवों को बचाने के कार्य में सक्रिय है। इस दौरान दल 1,300 से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन कर चुका है। टीम लगातार वन्यजीवों को सुरक्षित बचाने और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाने के लिए काम कर रही है।
इस रेस्क्यू अभियान में वंदे मातरम् दल और वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। टीम ने सावधानीपूर्वक अजगर को रेस्क्यू किया और बाद में उसे मोरनी के जंगलों में छोड़ दिया। विशालकाय अजगर को सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़कर टीम ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(रिपोर्ट- उमंग श्योराण)
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