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'मैंने ऑपरेशन सिंदूर में भाग लिया था', पत्नी की हत्या के आरोपी ब्लैक कैट कमांडो ने मांगी छूट, सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी क्लास

सुप्रीम कोर्ट ने दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले के एक दोषी को सरेंडर की छूट देने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि उसने ऑपरेशन सिंदूर में भाग लिया था। वह पिछले 20 सालों से, राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात एक ब्लैक कैट कमांडो है।

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Image Source : FILE PHOTO पत्नी की हत्या के आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी राहत।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दहेज के लिए पत्नी की हत्या के मामले के एक दोषी को सरेंडर की छूट देने से इनकार करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भाग लेने से आपको घर पर अत्याचार करने की छूट नहीं मिल जाती है। मंगलवार को जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने और क्या कहा?

हाई कोर्ट ने व्यक्ति की अपील को खारिज करते हुए उसकी सजा को बरकरार रखा था। शीर्ष अदालत ने शुरू में व्यक्ति को छूट देने में अनिच्छा व्यक्त की। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विक्रम चौधरी ने कहा कि व्यक्ति ने ऑपरेशन सिंदूर में भाग लिया था। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 20 साल से मैं राष्ट्रीय राइफल्स में ब्लैक कैट कमांडो के रूप में तैनात हूं।’’ तब बेंच ने कहा, ‘‘इससे आपको घर पर अत्याचार करने की छूट नहीं मिल जाती है। यह दर्शाता है कि आप शारीरिक रूप से कितने फिट हैं, और आप अकेले किस तरह से अपनी पत्नी को मार सकते थे, अपनी पत्नी का गला घोंट सकते थे।’’

'यह छूट का मामला नहीं है'

बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता को गंभीर अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था, इसलिए उसे छूट देने के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने मामले में नोटिस जारी किया और प्रतिवादियों से 6 हफ्ते में जवाब मांगा।

क्या है पूरा मामला?

जुलाई 2004 में अमृतसर की एक निचली अदालत ने याचिकाकर्ता बलजिंदर सिंह को उसकी शादी के दो साल के भीतर अपनी पत्नी की मौत के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-बी (दहेज हत्या) के तहत दोषी ठहराया था। पुलिस ने आरोप लगाया कि महिला को दहेज के लिए उसके ससुराल में उत्पीड़न और क्रूरता का सामना करना पड़ा।

'पति और ससुर ने चुन्नी से घोंट दिया गला'

मृतका के भाई और उसकी पत्नी सहित प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब वे 18 जुलाई, 2002 को सुबह 9 बजे उसके ससुराल पहुंचे तो उन्होंने देखा कि उसके पति और ससुर ने चुन्नी से उसका गला घोंट दिया, जबकि उसकी सास और ननद ने उसके हाथ-पैर पकड़ रखे थे। परिवार ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने शोर मचाया तो सभी आरोपी भाग गए और लेकिन उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

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