1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. वंदे मातरम बिल को राष्ट्रपति की मिली मंजूरी, फिर देश में क्यों मचा है घमासान?

वंदे मातरम बिल को राष्ट्रपति की मिली मंजूरी, फिर देश में क्यों मचा है घमासान?

वंदे मातरम बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसे लेकर अभी भी राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्ष के नेता इसे सरकार द्वारा जबरन लाने की बात कह रह हैं। वहीं मुस्लिम संगठनों ने भी एलान किया है कि मदरसों में वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा, क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता।

वंदे मातरम बिल को राष्ट्रपति की मिली मंजूरी।- India TV Hindi
Image Source : PTI/FILE वंदे मातरम बिल को राष्ट्रपति की मिली मंजूरी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वंदे मातरम बिल पर आज साइन कर दिए। अब देश के हर नागरिक को राष्ट्रगीत वंदे मातरम का उसी तरह सम्मान करना होगा, जैसे राष्ट्रगान जन-गण-मन का करना होता है। सभी सरकारी कार्यकर्मों में जन-गण-मन के साथ-साथ वंदे मारतम का भी गायन होगा। इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से भी वंदे मातरम गाया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी की स्पीच से पहले वंदे मातरम के पूरे 6 स्टेंजा गाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसी साल वंदे मातरम गीत के 150 साल पूरे हो रहे हैं, इसलिए स्वतंत्रता दिवस का थीम भी वंदे मातरम ही रखा गया है। लाल किले पर जब पहली बार वंदे मातरम गाया जाएगा, उस समय इंडियन एयरफोर्स के MI-17 हेलीकॉप्टर से लोगों पर फूलों की बारिश की जाएगी। उस हेलीकॉप्टर पर वंदे मातरम का बैनर भी लगा होगा। 

वंदे मारतम को लेकर राजनीति भी शुरू

सरकार की तैयारी पूरी है, लेकिन इसका विरोध भी शुरू हो गया है। वंदेमातरम को लेकर सबसे ज्यादा राजनीति महाराष्ट्र में हो रही है। कांग्रेस के नेताओं का आरोप है कि सरकार मुसलमानों को परेशान करने के लिए जबरदस्ती वंदे मातरम को थोपना चाहती है। इसके पीछे देशप्रेम नहीं, बीजेपी का रिलिजियस एजेंडा है। हालांकि महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने कहा कि ये हैरानी की बात है कि कुछ लोगों को राष्ट्रगीत में धर्म दिख रहा है। ऐसे लोगों को मजहबी चश्मा उतार कर देश के बारे में सोचना चाहिए। वहीं आदित्य ठाकरे ने एकनाथ शिंदे को जबाव देते हुए कहा कि अगर वंदे मातरम इतना ही जरूरी है, तो शिंदे को बीजेपी के नेताओं से पूछना चाहिए कि जब ये बिल पार्लियामेंट में पास हो रहा था तो प्रधानमंत्री और गृहमंत्री सदन में मौजूद क्यों नहीं थे।

नितेश राणे के बयान पर मचा घमासान

सबसे ज्यादा विवादित बात महाराष्ट्र सरकार में मंत्री नीतेश राणे ने कही। चूंकि कुछ मुस्लिम संगठनों ने एलान किया है कि मदरसों में वंदे मातरम नहीं गाया जाएगा, क्योंकि इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता। इस पर नीतेश राणे ने कहा कि जिन मदरसों को वंदे मातरम गाने से परहेज है, उनकी सरकारी फंडिंग रोक देनी चाहिए। नीतेश राणे के इस बयान पर महाविकास अघाड़ी के नेताओं ने नाराजगी जाहिर की। कांग्रेस के नेता नसीम खान ने कहा कि बीजेपी का देशप्रेम सिर्फ दिखावा है। जनता में बीजेपी के खिलाफ नाराजगी है, इसलिए लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बीजेपी ने वंदे मातरम का मुद्दा उठाया है और नीतेश राणे जैसे नेताओं को नफरती बयान देने के लिए आगे किया है।

यह भी पढ़ें-

अजित पवार की NCP में कलह! खतरे में सुनील तटकरे का प्रदेश अध्यक्ष पद, पार्टी के नेता ने ही चुनाव आयोग से की शिकायत

Latest India News