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Rajat Sharma's Blog | पेपर लीक के खिलाफ कठोर कानून पास

राजनीतिक दांव पेंच चलना स्वाभाविक है लेकिन इस समय आवश्यकता इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली के प्रति छात्रों और उनके मां-बाप का भरोसा फिर से कायम हो।

Rajat sharma, INDIA TV- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

लोकसभा ने आज पेपर लीक के खिलाफ बनाये गए कठोर बिल को हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित दिया। अब राज्यसभा में पास होने के बाद ये राष्ट्रपति की सम्मति के लिए जाएगा और कानून बन जाएगा। लोकसभा में बिल को लेकर जहां सभी पार्टियों के बीच सहमति नज़र आई, वहीं चर्चा के दौरान काफी तल्खी देखी गई। कल देर रात तक बहस हुई और आज प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण में गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाये गये आरोप को लेकर जमकर हंगामा हुआ।

कल प्रियंका गांधी ने टास्क फोर्स में शामिल IIT Madras के डायरेक्टर डॉक्टर कामकोटि को गोमूत्र विशेषज्ञ बताया तो बीजेपी के अनुराग ठाकुर ने डॉक्टर कामकोटि की डिग्रियां गिनवा दीं और ये भी कह दिया कि अगर गांधी परिवार की सारी डिग्रियां मिला ली जाएं तो भी उनकी शैक्षणिक योग्यता प्रोफेसर कामकोटि से कम होगी।

सबसे ज्यादा हंगामा तब हुआ जब प्रियंका गांधी ने नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर गुजरात में बिलकिस बानो के बलात्कारियों का बचाव करने का आरोप लगाया। प्रह्लाद जोशी ने इसे झूठ बताया और प्रियंका से सबूत मांगा।

संसद में पेपर लीक कानून में संशोधन हो जाएगा, ये बात पक्की है, पेपर लीक माफिया पर फंदा कस जाएगा ये बात भी निश्चित है। सरकार की नीयत भी साफ है और नीति भी। विपक्ष के ज्यादातर नेताओं का फोकस जंतर मंतर पर था, पुलिस की लाठी-गोली पर था, सरकार को घेरने पर था। प्रधानमंत्री मोदी का फोकस नई पीढ़ी की तरफ approach की कोशिश पर था। 

राजनीतिक दांव पेंच चलना स्वाभाविक है लेकिन इस समय आवश्यकता इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली के प्रति छात्रों और उनके मां-बाप का भरोसा फिर से कायम हो। सरकार ये सुनिश्चित करे कि पेपर लीक और नकल से छुटकारा मिलेगा और छात्रों को एक level playing field मिलेगी।

सुप्रीम कोर्ट तय करे, कौन छात्र थे, कौन अपराधी

इस बीच एक दूसरा विवाद पैदा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर कई बड़े आदेश दिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पुलिस को दर्ज FIR की जांच जारी रखने की इजाज़त दे दी। 

अदालत ने सभी राज्य सरकारों को आदेश दिया है कि गिरफ़्तार किए गए सभी नाबालिग़ प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए। प्रदर्शनकारियों  के ख़िलाफ़ कार्रवाई न की जाय और पुलिस  किसी भी प्रदर्शनकारी की निजी जानकारियों को सार्वजनिक न करे। सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ये कहा कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ में कई आपराधिक और समाजविरोधी तत्व भी थे, उनके पास हथियार थे। इन समाजविरोधियों  ने पुलिस अफसरों पर हमले किये, ढाई सौ से ज़्यादा पुलिसवाले घायल हुए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि पुलिस और दूसरी एजेंसियां इस घटना से जुड़े सारे फुटेज, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस, ड्रोन वीडियो, वायरलेस कम्युनिकेशन और पुलिस डायरी को सुरक्षित रखे। अदालत ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, बंगाल, बिहार और यूपी की सरकारों को नोटिस जारी किया। अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने सभी FIRs की जांच की अनुमति दिये जाने का कड़ा विरोध किया। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने सभी प्रदर्शनकारियों की बिना शर्त रिहाई का वादा किया था, सुप्रीम कोर्ट अगर उस समझौते में बदलाव करता है, तो वो CJP को मंज़ूर नहीं है।

अच्छा तो ये होगा कि सुप्रीम कोर्ट सब की बात सुने, छात्रों पर जो लाठी चली उसकी जांच हो, पुलिस पर जो पत्थर चले, उसकी भी जांच हो। सब कुछ कैमरे पर है, सब कुछ record पर है, हर घटना के चश्मदीद गवाह हैं लेकिन अन्तत: इस protest से सबक सीखना चाहिए। पुलिस के लिए ऐसे प्रोटेस्ट से  डील  करने का तरीका सुनिश्चित हो, इसकी जिम्मेदारी तय हो और समाजविरोधी तत्वों की पहचान करने  और उनके खिलाफ एक्शन लेने का तरीका भी तय हो। ये काम सुप्रीम कोर्ट को करना चाहिए ताकि किसी को कोई शिकायत न हो। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 28 जुलाई, 2026 का पूरा एपिसोड

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