नई दिल्ली: कुछ दिनों पहले पटना हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि किसी महिला की सलवार उतारने की कोशिश करना और उसकी छाती दबाकर शारीरिक छेड़छाड़ करने का आरोप 'दुष्कर्म की कोशिश' के अपराध के दायरे में नहीं आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुनाने से पहले पूरी रिसर्च नहीं होने पर चिंता जताई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने कहा कि कोर्ट पटना हाई कोर्ट के हालिया फैसले की जांच करके एक विस्तृत आदेश जारी करेगी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी सुनाया था ऐसा ही फैसला
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को पटना हाई कोर्ट के इस आदेश के बारे में जानकारी दी गई। यह जानकारी इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर स्वतः संज्ञान (suo motu) लेकर की जा रही सुनवाई के दौरान दी गई, जिसमें कहा गया था कि नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ना, उसके पजामे का नाड़ा खोलना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना 'रेप की कोशिश' के अपराध में नहीं आता है। इस मामले की सुनवाई के दौरान, बेंच ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी की एक्सपर्ट कमेटी द्वारा पेश की गई उस रिपोर्ट को मंज़ूरी दी, जिसमें यौन अपराध के मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता (judicial sensitivity) से जुड़े दिशानिर्देश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों को निर्देश जारी किया
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी अदालतों को निर्देश दिया है कि वे उसके द्वारा मंज़ूर किए गए हैंडबुक/दिशानिर्देशों में इस्तेमाल की गई बातों का सख्ती से पालन करें। इस साल की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (National Judicial Academy) को निर्देश दिया था कि वह यौन अपराध के मामलों में न्यायिक कार्यवाही के दौरान संवेदनशीलता और सहानुभूति लाने के लिए व्यापक दिशानिर्देशों का मसौदा तैयार करे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसे नियम भारत के सामाजिक ताने-बाने को दर्शाने वाले होने चाहिए, न कि विदेशी कानूनों से लिए गए हों और अदालतों को इस पर ध्यान रहना चाहिए।
(इनपुट-ANI)
ये भी पढ़ें:
सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के मामले में दो लॉ स्टूडेंट गिरफ्तार, कागज फेंककर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का मामला
Latest India News