बांग्लादेश से निष्कासन की दूसरी बरसी पर उनकी पूर्व प्रधानमंत्री और बांग्लादेशी आवामी लीग की अध्यक्षा शेख हसीना ने संबोधन किया। इस कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा कि ये वो बांग्लादेश नहीं जिसके लिए 30 लाख लोग बलिदान हुए। 1971 का मूवमेंट हुआ। यह कहते हुए शेख हसीना इमोशनल भी हो गईं। मैं एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर बोल रही हूं जिसने अपनी जिंदगी बांग्लादेश के लोगों के साथ बिताई है, जिसे अपने देश से दूर जाने पर मजबूर होना पड़ा, लेकिन मैं कभी भी अपने लोगों से अलग नहीं हुई। शेख हसीना बोलीं कि मुझे अपने भविष्य की नहीं, बांग्लादेश के फ्यूचर की चिंता है। बांग्लादेश के लोगों को सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति चाहिए।
मुझे पता है वो मुझे मार सकते हैं लेकिन फिर भी जाऊंगी
शेख हसीना ने कहा कि 1981 में जब मैं बांग्लादेश लौटी थी तब भी उन्होंने मुझे रोकने की कोशिश की। वापसी के बाद मुझे कई बार गिरफ्तार किया गया। लेकिन मैं वतन वापसी से नहीं रुकी। मुझे अपने भविष्य की चिंता नहीं है, मुझे बांग्लादेश के भविष्य की चिंता है।
मुझे पता है कि बांग्लादेश जाने पर वह मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मार सकते हैं या जेल में डाल सकते हैं, लेकिन मैं वापस जरूर जाऊंगी: शेख हसीना
वह एक ऑर्गेनाइज्ड प्रोटेस्ट था- शेख हसीना
दो साल पहले बांग्लादेश के प्रदर्शन पर बोलते हुए शेख हसीना ने कहा, 'पिछले दो साल से, मैंने अपने प्यारे बांग्लादेश को मुश्किलों से गुजरते देखा है। यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसे हमने बनाया था, यह वह बांग्लादेश नहीं है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी। मैं जुलाई और अगस्त 2024 की सच्चाई से अपनी बात शुरू करना चाहती हूं। यह छात्रों का कोई शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। शुरू से ही, मेरी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य से इस मुद्दे को शांति से सुलझाने की कोशिश की। लेकिन सुधार की बात की आड़ में, कुछ संगठित समूह छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने की कोशिश कर रहे थे।'
मुहम्मद यूनुस ने खुद कबूल की आंदोलन के मास्टरमाइंड वाली बात
शेख हसीना ने कहा कि खुद मुहम्मद यूनुस ने कहा था कि यह एक मास्टरमाइंड की अगुवाई में बहुत सोच-समझकर चलाया गया आंदोलन था। उनके अपने शब्द ही सच्चाई को उजागर करते हैं। यह केवल स्टूडेंट्स का अचानक शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शन नहीं था। इसमें कोई साफ या जिम्मेदार नेतृत्व नहीं था, बल्कि निर्देश पर्दे के पीछे से दिए जा रहे थे। इसे संगठित और निर्देशित किया गया था।
शेख हसीना की मांगें
- आवामी लीग से बैन हटे।
- पॉलिटिकल प्रिजनर फ्री हों।
- झूठे केस हटाए जाएं।
- फ्रीडम ऑफ स्पीच रिस्टोर हो।
- प्रेस फीडम की सुरक्षा हो।
- न्यायिक व्यवस्था की आजादी की गारंटी हो।
- कानूनी एजेंसियां लोगों की सेवा करें, उनका इस्तेमाल पावरफुल लोगों के लिए ना हो।
हम बांग्लादेश को एक फेल्ड स्टेट नहीं बनने देना चाहते- नौफेल
शेख हसीना के बोलने से पहले उनकी पार्टी आवामी लीग के नेताओं ने बांग्लादेश की सत्ता के पूर्व सलाहकार मोहम्मद यूनुस पर भी जुबानी हमला बोला। बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार में मंत्री रहे मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल ने कहा कि हम बदला नहीं चाहते हैं। हम बस इंसाफ चाहते हैं। हम अपील करना चाहते हैं कि बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद को सपोर्ट ना करें। हम बांग्लादेश को एक फेल्ड स्टेट नहीं बनने देना चाहते हैं।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से भारत सरकार का कोई लेना-देना नहीं
शेख हसीना की ये वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस नई दिल्ली के द फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में हुई। इसको लेकर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार का इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से कोई लेना-देना नहीं है। ना ही इस मंच से कही जाने वाली बातों का समर्थन करती है।
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