तेजाब हमला पीड़ितों को रेल यात्रा में रियायत मामले की आज (बुधवार को) सुप्रीम कोर्ट में चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट ने आज (बुधवार को) कहा कि दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को तेजाब के हमले के पीड़ितों को ट्रेन की यात्रा में रियायत देने की पॉलिसी तैयार करने में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए, ताकि वे अपने इलाज के लिए बेहतर सुविधाओं वाले हॉस्पिटल्स तक सफर कर सकें।
केंद्र सरकार ने तैयार किया मसौदा
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने इस दलील पर गौर किया कि केंद्र सरकार ने याचिकाकर्ता NGO अतिजीवन सोसाइटी सहित अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद पॉलिसी का एक मसौदा तैयार किया है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को भी अंतिम नीति तैयार करने के प्रोसेस में शामिल किया जाना चाहिए।
रियायत पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है सरकार
इसके बाद बेंच ने इस केस को आगे की सुनवाई के लिए लिस्ट कर दिया। इससे पहले 13 अगस्त को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह तेजाब हमला पीड़ितों को ट्रेन के किराए में रियायत देने के लिए पॉलिसी बनाने पर सैद्धांतिक तौर पर सहमत है। सुप्रीम कोर्ट ने रेल मंत्रालय से इस केस में उदारतापूर्वक रियायत देने पर विचार करने को कहा था। साथ ही, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे को 6 हफ्ते के अंदर पॉलिसी का मसौदा सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में दाखिल करने को भी कहा था।
'मरीज कैटेगरी' के तहत रियायत देने का है प्रपोजल
अर्चना दवे ने बताया कि केंद्र सरकार इस सुविधा को 'मरीज कैटेगरी' के तहत देने का प्रपोजल कर रही है और केंद्र सरकार को तेजाब हमला पीड़ितों को दिव्यांगजन की अलग कैटेगरी में रखने को लेकर कुछ आपत्तियां हैं, ऐसा इसलिए क्योंकि वर्तमान में उस दिव्यांग कैटेगरी के अन्य लोगों को रेलवे में रियायत नहीं मिलती है। इसके अलावा, एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर सवाल उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह तो लूट है। सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर की दवाओं की कीमत 10 गुना बढ़ाने पर नाराजगी जताई थी।
(इनपुट- भाषा)
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