1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. 'आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान पत्र के रूप में हो', याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस

'आधार का इस्तेमाल सिर्फ पहचान पत्र के रूप में हो', याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस

आधार के इस्तेमाल को लेकर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिका में मांग की गई है कि आधार को केवल पहचान पत्र के रूप में सीमित किया जाए, न कि नागरिकता या अन्य दस्तावेजों के प्रमाण के रूप में।

Aadhaar Supreme Court Case, Aadhaar Identity Proof PIL, UIDAI Aadhaar Rules- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV सुप्रीम कोर्ट ने आधार के इस्तेमाल को लेकर याचिका पर केंद्र, राज्य सरकारों और EC को नोटिस भेजा है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों और भारतीय चुनाव आयोग से उस जनहित याचिका (PIL) पर जवाब मांगा है, जिसमें मांग की गई है कि आधार का इस्तेमाल केवल पहचान पत्र के रूप में ही सीमित किया जाए, न कि नागरिकता, निवास, पता या जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर। अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई याचिका में कोर्ट से यह निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार को सिर्फ पहचान के रूप में ही माना जाए।

आधार कानून को लेकर दी गई ये दलील

याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा समय में आधार का इस्तेमाल कई सरकारी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किया जा रहा है, जो कानून में तय सीमाओं से आगे है। याचिका में कहा गया है कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 के अनुसार आधार नागरिकता या निवास का प्रमाण नहीं है। इसके अलावा UIDAI की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना में भी साफ किया गया है कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, न कि नागरिकता, पता या जन्मतिथि का।

कहां-कहां आधार के इस्तेमाल पर है आपत्ति?

याचिकाकर्ता का कहना है कि इसके बावजूद आधार का इस्तेमाल कई जगहों पर किया जा रहा है, जैसे:

  1. स्कूल में एडमिशन
  2. वोटर रजिस्ट्रेशन
  3. राशन कार्ड बनवाने में
  4. ड्राइविंग लाइसेंस
  5. संपत्ति खरीदने और अन्य कई प्रक्रियाएं, जहां नागरिकता या उम्र का प्रमाण जरूरी होता है

याचिका में अवैध प्रवासियों पर गंभीर आरोप

पिटीशन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कमजोर वेरिफिकेशन सिस्टम की वजह से घुसपैठिए और अवैध प्रवासी आधार कार्ड बनवा लेते हैं और फिर इसका इस्तेमाल अन्य पहचान दस्तावेज जैसे वोटर आईडी कार्ड हासिल करने में करते हैं। इससे न सिर्फ सरकारी योजनाओं के लाभ वितरण पर असर पड़ता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।

याचिका में वोटर फॉर्म पर भी उठाया सवाल

याचिका में कहा गया है कि रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत बनने वाले फॉर्म-6 में आधार को जन्मतिथि और निवास प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, जो याचिकाकर्ता के अनुसार आधार अधिनियम और UIDAI दिशानिर्देशों के खिलाफ है। याचिका में संविधान के कई अनुच्छेदों का हवाला दिया गया है, जिनमें अनुच्छेद 14, 19, 21, 29, 326, 327 और 355 शामिल हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अवैध घुसपैठ का असर चुनावी ईमानदारी, जनसंख्या संतुलन, कल्याणकारी योजनाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी गई?

याचिका में मांग की गई है कि सभी संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया जाए कि आधार को केवल पहचान पत्र के रूप में ही स्वीकार किया जाए, और इसे आधार अधिनियम 2016 की धारा 9 तथा UIDAI की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना की भावना के अनुसार ही लागू किया जाए। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

ये भी पढ़ें:

असम में 18 साल से ऊपर के लोगों का नहीं बनेगा आधार कार्ड, कैबिनेट ने लिया फैसला; CM ने बताया क्यों था जरूरी

UIDAI बंद कर रहा mAadhaar ऐप, जानें अब कहां से करें आधार डाउनलोड

Latest India News