Supreme Court: धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के एक आरोपी को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसकी जमानत के साथ लगाई गई 75 लाख रुपए के मुचलके की शर्त समाप्त कर दी है। गौरतलब है कि आरोपी को चार साल पहले जमानत मिलने के बावजूद मुचलके की राशि जमा नहीं हो पाने के कारण उसकी रिहाई नहीं हो पाई थी। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम.एम. सुन्दरेश की पीठ ने आरोपी के वकील द्वारा 75 लाख रुपए की राशि जमा करने में असमर्थता जताए जाने पर उक्त आदेश पारित किया। पीठ ने कहा कि मामले के तथ्यों को परखने के बाद कि इस अदालत द्वारा आदेश पारित किए जाने के चार साल बाद भी आवेदक जेल में बंद है, हमें उचित लगता है कि 2018 में लगायी गई जमानत की शर्त संख्या 7ए को समाप्त कर दिया जाए।
कोर्ट ने पहले 50 लाख रुपए मुचलके के पर दी थी जमानत
आरोपी हर्षदेव ठाकुर की ओर से पेश वकील नमित सक्सेना ने दलील दी कि यह जाना-माना कानून है कि जमानत देते हुए ऐसी शर्तें नहीं लगायी जा सकती हैं और तमाम प्रयासों के बावजूद आरोपी 75 लाख रुपए की राशि एकत्र नहीं कर सका क्योंकि वह जेल में बंद है। इससे पहले 2018 में ठाकुर को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 50 लाख रुपए के मुचलके पर जमानत दी थी। बाद में शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए 50 लाख रुपये के मुचलके की शर्त से इतर 75 लाख रुपये का अतिरिक्त मुचलका जमा करने को कहा था।
Latest India News