जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बुधवार को दिल्ली में पार्टी के सांसदों के साथ बैठक की है। सामने आई जानकारी के अनुसार, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा के सांसद नीतीश कुमार ने जदयू के सांसदों से कहा है कि वे बिहार से जुड़े मुद्दों को संसद में प्रभावी ढंग से उठाने का काम करें। बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने बिहार के विकास, जनहित से जुड़े विषयों तथा वर्तमान में जारी राजनीति के मुद्दों पर भी चर्चा की है।
सांसदों को दिए गए निर्देश
PTI ने जदयू की ओर से जारी किए गए बयान के हवाले से बताया है कि दिल्ली में हुई इस बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सांसदों से आह्वान किया कि वे बिहार के हितों और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को देश की संसद में प्रभावी ढंग से उठाए और बिहार की जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करें। जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान बिहार के विकास और आम लोगों के हित से जुड़े हुए अनेक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली थी। इसके बाद नीतीश कुमार ने 14 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
जदयू ने क्या बताया?
दिल्ली में हुई इस बैठक को लेकर जदयू ने भी सोशल मीडिया पर अपडेट जारी किया है। पार्टी ने कहा- "जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं माननीय राज्यसभा सांसद, नीतीश कुमार से आज नई दिल्ली में जद (यू) के सांसदगणों ने शिष्टाचार भेंट की और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर पर पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा, डॉ. आलोक कुमार सुमन, कौशलेन्द्र कुमार, देवेश चंद्र ठाकुर, विजयलक्ष्मी देवी, रामप्रीत मंडल, दिलेश्वर कामैत, सुनील कुमार एवं बिहार विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उपनेता ललन सर्राफ आदि इस मौके पर उपस्थित रहे।"
पहले सदन में ऐसे व्यवधान नहीं होते थे- नीतीश
जानकारी के अनुसार, नीतीश कुमार ने संसद में हो रहे विरोध प्रदर्शन पर भी बयान दिया है। जदयू के सांसद संजय झा ने बुधवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान कहा कि नीतीश कुमार दो दशक से ज्यादा समय के बाद संसद में लौटे हैं। सांसद संजय झा ने बताया कि नीतीश कुमार ने उनसे कहा है कि उनके पहले के कार्यकाल में सदन में इस तरह के व्यवधान देखने को नहीं मिलते थे। इस तरह के विरोध प्रदर्शन नहीं होते थे। (इनपुट: भाषा)
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