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बांकीपुर में बीजेपी की हार के बाद पीएम मोदी से मिले नीतीश कुमार, संसद भवन में हुई मुलाकात

 Written By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
 Published : Aug 04, 2026 12:10 pm IST,  Updated : Aug 04, 2026 01:31 pm IST

बांकीपुर उपचुनाव में हुई एनडीए की हार के बाद नीतीश कुमार आज संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद मोदी से मिले। इस मुलाकात को काफी अहम बताया जा रहा है।

नरेंद्र मोदी और नीतीश...- India TV Hindi
नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार (फाइल फोटो) Image Source : PTI

नई दिल्ली: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के सुप्रीमो नीतीश कुमार आज संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र से मिले। इस मुलाकात के बाद सियासी गलियारों ने चर्चाओं का बाजार गरमाने लगा है।  यह मीटिंग इस मायने में अहम है कि दोनों नेताओं की यह मुलाकात बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी की हार के तुरंत बाद हुई है। बांकीपुर उपचुनाव में जनसुराज के प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को 19 हजार से अधिक मतों से हरा दिया। 

बीजेपी के गढ़ में जनसुराज ने लगाई सेंध

बांकीपुर सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है  इस विधानसभा सीट पर 1995 से बीजेपी लगातार जीत दर्ज करती रही थी।बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार पांच चुनाव जीत चुके हैं। उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी। लेकिन उपचुनाव में मिली हार से बीजेपी को करारा झटका मिला है। जिस जनसुराज पार्टी को नवंबर 2025 में हुए विधानसभा चुनाव में एक सीट भी नहीं मिली थी, उसने बीजेपी के गढ़ में सेंध लगा दी और नतीजों से सबको चौंका दिया।

नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज 

बांकीपुर के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। बीजेपी के मजबूत गढ़ में उसे पटखनी देने को राजनीतिक विश्लेषक महज चुनावी सफलता नहीं बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत मान रहे हैं। जिस सीट के लिए बीजेपी के नेताओं को इतना भरोसा था कि वे जिसे भी इस सीट से उम्मीदवार बनाएंगे, वह जीत जाएगा।

बांकीपुर विधानसभा सीट 1995 से लगातार बीजेपी के कब्जे में रही थी। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके पुत्र नितिन नवीन ने इस सीट पर पार्टी का दबदबा कायम रखा। नितिन नवीन ने 2010, 2015, 2020 और 2025 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की थी। हालांकि, इस उपचुनाव में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर ने मुकाबले को बदल दिया। चुनावी रणनीतिकार के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे प्रशांत किशोर ने जन सुराज अभियान के माध्यम से खुद को वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व के रूप में पेश किया। उन्होंने उपचुनाव के दौरान शिक्षा, रोजगार, पलायन और व्यवस्था परिवर्तन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

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